ब्रिक्स (BRICS) का विस्तार और नई साझा मुद्रा पर चर्चा
ब्रिक्स देशों के नेताओं ने संगठन के और विस्तार और व्यापार के लिए एक नई साझा मुद्रा की संभावनाओं पर चर्चा की है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ब्रिक्स (BRICS) देशों ने व्यापार के लिए एक साझा मुद्रा विकसित करने पर विचार किया है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो सके।
- ईरान, सऊदी अरब, मिस्र, इथियोपिया, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए रुचि दिखाई है।
- ब्रिक्स के विस्तार के बाद इसका नाम 'ब्रिक्स+' (BRICS+) हो सकता है, जिससे सदस्य देशों की संख्या बढ़ेगी।
- इस विस्तार से 'ग्लोबल साउथ' का वैश्विक मंच पर प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है।
- भारत ने ब्रिक्स विस्तार प्रक्रिया में पारदर्शिता और सर्वसम्मति पर जोर दिया है।
- एक साझा मुद्रा का विकास सदस्य देशों के बीच व्यापार को सुगम बना सकता है और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है।
- यह पहल वैश्विक वित्तीय प्रणाली में बहुध्रुवीयता की ओर एक कदम है और डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देती है।
- साझा मुद्रा के विकास में सदस्य देशों की मौद्रिक नीतियों में सामंजस्य और राजनीतिक इच्छाशक्ति जैसी चुनौतियां हैं।
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 10–20 | International relations is a core GS-II topic for UPSC. Bilateral agreements, multilateral bodies, and geopolitics are essential. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | G20, IMF/World Bank decisions, and global trade events are tested in banking exams. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | International summits, treaties, and India's bilateral relations appear in SSC GK. |
Key Facts to Remember: ब्रिक्स (BRICS) का विस्तार और नई साझा मुद्रा पर चर्चा
- ब्रिक्स (BRICS) देशों ने व्यापार के लिए एक साझा मुद्रा विकसित करने पर विचार किया है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो सके।
- ईरान, सऊदी अरब, मिस्र, इथियोपिया, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए रुचि दिखाई है।
- ब्रिक्स के विस्तार के बाद इसका नाम 'ब्रिक्स+' (BRICS+) हो सकता है, जिससे सदस्य देशों की संख्या बढ़ेगी।
- इस विस्तार से 'ग्लोबल साउथ' का वैश्विक मंच पर प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है।
- भारत ने ब्रिक्स विस्तार प्रक्रिया में पारदर्शिता और सर्वसम्मति पर जोर दिया है।
- एक साझा मुद्रा का विकास सदस्य देशों के बीच व्यापार को सुगम बना सकता है और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है।
- यह पहल वैश्विक वित्तीय प्रणाली में बहुध्रुवीयता की ओर एक कदम है और डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देती है।
- साझा मुद्रा के विकास में सदस्य देशों की मौद्रिक नीतियों में सामंजस्य और राजनीतिक इच्छाशक्ति जैसी चुनौतियां हैं।
Practice Questions
Q1. हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने किस प्रमुख वित्तीय प्रस्ताव पर विचार किया?
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में सुधार
- एक नई साझा व्यापार मुद्रा का विकास
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) का पुनर्गठन
- सभी सदस्य देशों के लिए एक समान कर प्रणाली
Explanation: ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से एक साझा व्यापार मुद्रा विकसित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की।
Q2. ब्रिक्स के विस्तार के लिए किन देशों ने हाल ही में अपनी सदस्यता की इच्छा व्यक्त की है?
- मेक्सिको, तुर्की, इंडोनेशिया
- ईरान, सऊदी अरब, मिस्र
- वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया
- नाइजीरिया, केन्या, घाना
Explanation: ईरान, सऊदी अरब, मिस्र, इथियोपिया, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने के लिए अपनी रुचि दिखाई है।
Q3. ब्रिक्स के विस्तार का 'ग्लोबल साउथ' पर क्या संभावित प्रभाव पड़ेगा?
- वैश्विक मंच पर इसका प्रभाव कम हो जाएगा।
- आर्थिक विकास दर में गिरावट आएगी।
- इसकी आवाज और प्रभाव में वृद्धि होगी।
- यह पश्चिमी देशों पर अधिक निर्भर हो जाएगा।
Explanation: ब्रिक्स के विस्तार से 'ग्लोबल साउथ' के देशों का वैश्विक भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था में प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है, जिससे उनकी आवाज मजबूत होगी।
Q4. भारत ने ब्रिक्स के विस्तार और नई मुद्रा के विकास के संबंध में किस बात पर जोर दिया है?
- केवल चीन के नेतृत्व का समर्थन
- पारदर्शिता और सर्वसम्मति
- अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को बनाए रखना
- सदस्य देशों के बीच असमानता
Explanation: भारत ने ब्रिक्स के विस्तार और किसी भी नई वित्तीय पहल में पारदर्शिता और सभी सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति के महत्व पर विशेष बल दिया है।
Q5. ब्रिक्स देशों द्वारा एक साझा व्यापार मुद्रा विकसित करने का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह से प्रतिस्थापित करना
- सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का गठन करना
- सभी सदस्य देशों के लिए एक समान आर्थिक नीति लागू करना
Explanation: साझा मुद्रा का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों को अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे विनिमय दर के उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता से बचा जा सके।
How to Prepare International Affairs for Government Exams — ब्रिक्स (BRICS) का विस्तार और नई साझा मुद्रा पर च…
Focus on India-centric news — India's bilateral visits, MoUs signed, and positions in international bodies. This is what domestic exams test.
For UPSC, understand geopolitical context: Why does India take a particular position? What is India's strategic interest?
Keep a running note of all G20, SCO, BRICS, and QUAD-related outcomes. These bodies generate 3–5 questions per major exam cycle.
Related Current Affairs
Test Your Knowledge on Today's Current Affairs
10 questions · 10 minutes · Based on today's GK updates. See how prepared you really are.
Start Daily Quiz