महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में 10,000 साल पुराने पेट्रोग्लिफ्स की नई खोज
पुरातत्वविदों ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में मध्यपाषाण काल के दुर्लभ रॉक आर्ट (पेट्रोग्लिफ्स) की खोज की है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में लगभग 10,000 साल पुराने मध्यपाषाण काल के पेट्रोग्लिफ्स की खोज हुई है।
- इन पेट्रोग्लिफ्स में दरियाई घोड़े और गैंडे जैसे अनुपस्थित जानवरों के चित्र मिले हैं, जो प्राचीन जलवायु की ओर इशारा करते हैं।
- यह खोज डॉ. अजित कुलकर्णी के नेतृत्व वाली पुरातत्वविदों की टीम ने 2026 में की है।
- पेट्रोग्लिफ्स में जानवरों, पक्षियों और मानव आकृतियों को दर्शाया गया है, जो तत्कालीन पारिस्थितिकी तंत्र और सामाजिक जीवन की जानकारी देते हैं।
- यह खोज भारत के प्रागैतिहासिक मानव इतिहास, कला और पर्यावरण के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- मध्यपाषाण काल (लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 8,000 ईसा पूर्व) मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण संक्रमणकालीन दौर था।
- भारत में मध्यपाषाण काल के अन्य प्रमुख पेट्रोग्लिफ स्थलों में भीमबेटका (मध्य प्रदेश) शामिल है।
- यह खोज कोंकण क्षेत्र की प्राचीन जलवायु और जैव विविधता में हुए परिवर्तनों को समझने में मदद करती है।
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Low | 2–5 | UPSC focuses on depth, not breadth. General items are tested only when they have policy relevance. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Miscellaneous GK is tested across all state exam categories. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Miscellaneous GK including appointments, books, summits, and records appears in SSC. |
Key Facts to Remember: महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में 10,000 साल पुराने पेट्रोग्लिफ्स की नई खोज
- महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में लगभग 10,000 साल पुराने मध्यपाषाण काल के पेट्रोग्लिफ्स की खोज हुई है।
- इन पेट्रोग्लिफ्स में दरियाई घोड़े और गैंडे जैसे अनुपस्थित जानवरों के चित्र मिले हैं, जो प्राचीन जलवायु की ओर इशारा करते हैं।
- यह खोज डॉ. अजित कुलकर्णी के नेतृत्व वाली पुरातत्वविदों की टीम ने 2026 में की है।
- पेट्रोग्लिफ्स में जानवरों, पक्षियों और मानव आकृतियों को दर्शाया गया है, जो तत्कालीन पारिस्थितिकी तंत्र और सामाजिक जीवन की जानकारी देते हैं।
- यह खोज भारत के प्रागैतिहासिक मानव इतिहास, कला और पर्यावरण के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- मध्यपाषाण काल (लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 8,000 ईसा पूर्व) मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण संक्रमणकालीन दौर था।
- भारत में मध्यपाषाण काल के अन्य प्रमुख पेट्रोग्लिफ स्थलों में भीमबेटका (मध्य प्रदेश) शामिल है।
- यह खोज कोंकण क्षेत्र की प्राचीन जलवायु और जैव विविधता में हुए परिवर्तनों को समझने में मदद करती है।
Practice Questions
Q1. महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में हाल ही में खोजी गई पेट्रोग्लिफ्स किस पुरातात्विक काल की मानी जाती हैं?
- नवपाषाण काल
- ताम्रपाषाण काल
- मध्यपाषाण काल
- लौह युग
Explanation: खोजी गई पेट्रोग्लिफ्स की अनुमानित आयु लगभग 10,000 वर्ष है, जो मध्यपाषाण काल (Mesolithic era) के अंतर्गत आती है। यह काल शिकारी-संग्राहक जीवन से कृषि की ओर संक्रमण का काल था।
Q2. रत्नागिरी में पाई गई पेट्रोग्लिफ्स में किन जानवरों के चित्र मिले हैं जो वर्तमान भारतीय उपमहाद्वीप में नहीं पाए जाते?
- शेर और बाघ
- हाथी और चीता
- दरियाई घोड़ा और गैंडा
- भालू और लोमड़ी
Explanation: इन पेट्रोग्लिफ्स की एक अनूठी विशेषता यह है कि इनमें दरियाई घोड़े और गैंडों जैसे जानवरों के चित्र शामिल हैं, जो वर्तमान में भारत में नहीं पाए जाते। यह प्राचीन काल की भिन्न जलवायु और पारिस्थितिकी का संकेत देता है।
Q3. यह महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज किस वर्ष में हुई थी?
- 2024
- 2025
- 2026
- 2027
Explanation: पुरातत्वविदों की टीम ने 2026 की शुरुआत में महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में इन दुर्लभ रॉक-कट कलाकृतियों की खोज की। यह खोज क्षेत्र के प्रागैतिहासिक इतिहास पर प्रकाश डालती है।
Q4. भारत में मध्यपाषाण काल के पेट्रोग्लिफ्स के लिए एक प्रसिद्ध स्थल कौन सा है, जिसका उल्लेख कोंकण खोज के संदर्भ में किया गया है?
- हड़प्पा
- मोहनजोदड़ो
- भीमबेटका
- लोथल
Explanation: मध्यपाषाण काल के पेट्रोग्लिफ्स के लिए भारत में भीमबेटका (मध्य प्रदेश) एक अत्यंत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण स्थल है। कोंकण क्षेत्र की खोज की तुलना अक्सर इसी स्थल से की जाती है।
Q5. इन पेट्रोग्लिफ्स में दर्शाए गए विषय क्या हैं और वे किस प्रकार के ज्ञान प्रदान करते हैं?
- केवल धार्मिक अनुष्ठान, जो तत्कालीन मान्यताओं को दर्शाते हैं।
- मुख्य रूप से कृषि पद्धतियाँ, जो प्रारंभिक कृषि समाज का संकेत देती हैं।
- जानवर, पक्षी और मानव आकृतियाँ, जो पारिस्थितिकी तंत्र और सामाजिक जीवन की जानकारी देते हैं।
- केवल युद्ध और शिकार के दृश्य, जो तत्कालीन संघर्षों को दर्शाते हैं।
Explanation: रत्नागिरी में खोजी गई पेट्रोग्लिफ्स में विभिन्न प्रकार के जानवरों, पक्षियों और मानव आकृतियों को दर्शाया गया है। ये चित्र उस समय के पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीवों, मानव गतिविधियों और सामाजिक जीवन की बहुमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं।
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