DRDO ने किया 'अग्नि-Prime' मिसाइल का सफल परीक्षण
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट से नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-प्राइम' का सफल परीक्षण किया है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- 'अग्नि-प्राइम' (Agni-P) भारत की नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल है जिसका DRDO ने सफल परीक्षण किया है।
- इसकी मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच है।
- यह एक दो चरणों वाली, कनिस्टरीकृत ठोस प्रणोदक मिसाइल है।
- कनिस्टर आधारित होने के कारण इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है और कम समय में लॉन्च किया जा सकता है।
- इसमें उन्नत नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणाली लगी है, जो इसकी सटीकता बढ़ाती है।
- यह मिसाइल भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) को मजबूत करती है।
- इसका परीक्षण ओडिशा के डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
- 'अग्नि-प्राइम' भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) का हिस्सा है।
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | Defence acquisitions, military exercises, and appointments appear in SSC GK. |
| UPSC / State PCS | Medium | 4–8 | UPSC focuses on strategic aspects: defence policy, Indo-Pacific, border issues, and bilateral defence deals. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–5 | Army, Navy, and Air Force current events are regularly tested in Railway GK. |
Key Facts to Remember: DRDO ने किया 'अग्नि-Prime' मिसाइल का सफल परीक्षण
- 'अग्नि-प्राइम' (Agni-P) भारत की नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल है जिसका DRDO ने सफल परीक्षण किया है।
- इसकी मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच है।
- यह एक दो चरणों वाली, कनिस्टरीकृत ठोस प्रणोदक मिसाइल है।
- कनिस्टर आधारित होने के कारण इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है और कम समय में लॉन्च किया जा सकता है।
- इसमें उन्नत नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणाली लगी है, जो इसकी सटीकता बढ़ाती है।
- यह मिसाइल भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) को मजबूत करती है।
- इसका परीक्षण ओडिशा के डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
- 'अग्नि-प्राइम' भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) का हिस्सा है।
Practice Questions
Q1. 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता कितनी है?
- 500 से 1,000 किलोमीटर
- 1,000 से 2,000 किलोमीटर
- 2,000 से 3,000 किलोमीटर
- 3,000 से 4,000 किलोमीटर
Explanation: 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल की मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच है। यह इसे मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल की श्रेणी में रखती है।
Q2. 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल की क्या विशेषता इसे विशेष बनाती है?
- यह केवल तरल प्रणोदक का उपयोग करती है।
- यह एक चरण वाली मिसाइल है।
- यह कनिस्टरीकृत है, जिससे त्वरित तैनाती संभव है।
- इसकी मारक क्षमता केवल 500 किलोमीटर है।
Explanation: 'अग्नि-प्राइम' एक कनिस्टरीकृत मिसाइल है, जिसका अर्थ है कि इसे एक विशेष कंटेनर में संग्रहीत किया जाता है। यह इसे लंबी दूरी तक ले जाने और बहुत कम समय में लॉन्च करने की सुविधा प्रदान करता है।
Q3. 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल का सफल परीक्षण किस स्थान से किया गया?
- चांदीपुर, ओडिशा
- पोखरण, राजस्थान
- डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा
- श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
Explanation: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप (पहले व्हीलर द्वीप) से 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
Q4. 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल किस प्रकार के प्रणोदक का उपयोग करती है?
- तरल प्रणोदक
- हाइब्रिड प्रणोदक
- परमाणु प्रणोदक
- ठोस प्रणोदक
Explanation: 'अग्नि-प्राइम' एक ठोस प्रणोदक मिसाइल है। ठोस प्रणोदक मिसाइलों को अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाते हैं, और उन्हें लंबे समय तक संग्रहीत किया जा सकता है।
Q5. 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल के विकास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- केवल पारंपरिक हथियारों को ले जाना
- भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना
- अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए
- मौसम की भविष्यवाणी करना
Explanation: 'अग्नि-प्राइम' मिसाइल का विकास भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) को और मजबूत करने के लिए किया गया है। यह भारत की सुरक्षा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
How to Prepare Defence for Government Exams — DRDO ने किया 'अग्नि-Prime' मिसाइल का सफल परीक्षण
For every military exercise, note: India + Partner country + Purpose (bilateral or multilateral). Questions are pattern-based.
Defence indigenization ('Atmanirbhar Bharat in Defence') is a high-priority topic for 2025–26. Focus on systems developed by DRDO or HAL.
Chiefs of defence services change periodically. Always keep the current CDS, Army Chief, Navy Chief, and Air Chief up to date.
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