वैश्विक प्लास्टिक संधि: प्रदूषण मुक्त भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौता
प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- वैश्विक प्लास्टिक संधि प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसे UNEP के तत्वावधान में विकसित किया जा रहा है।
- यह संधि प्लास्टिक के उत्पादन, उपयोग, पुनर्चक्रण और निपटान सहित पूरे जीवनचक्र को विनियमित करने का प्रयास करती है।
- मार्च 2022 में UNEA द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद संधि पर बातचीत शुरू हुई, जिसमें 175 देशों का समर्थन प्राप्त था।
- भारत ने संधि में 'सर्कुलर इकोनॉमी' और 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' (EPR) जैसे सिद्धांतों को शामिल करने का पुरजोर समर्थन किया है।
- अंतर-सरकारी वार्ता समिति (INC) की विभिन्न बैठकें (INC-1, INC-2, INC-3, INC-4) संधि के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित की गई हैं।
- संधि का उद्देश्य 2040 तक प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना है और यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- यह संधि समुद्री जीवन, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ एक स्थायी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण है।
- 2026 में संधि के कार्यान्वयन के रोडमैप पर चर्चा होने की उम्मीद है, जो वैश्विक पर्यावरण शासन में एक मील का पत्थर है।
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 12–20 | Environment and Ecology is a separate section in UPSC Prelims. GS-III includes environment, climate change, and disaster management. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | National parks, Ramsar sites, pollution levels, and climate summits appear in SSC GK. |
| State PCS / PSC | High | 5–8 | State PCS papers test both central environment policy and state-specific conservation achievements. |
Key Facts to Remember: वैश्विक प्लास्टिक संधि: प्रदूषण मुक्त भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौता
- वैश्विक प्लास्टिक संधि प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसे UNEP के तत्वावधान में विकसित किया जा रहा है।
- यह संधि प्लास्टिक के उत्पादन, उपयोग, पुनर्चक्रण और निपटान सहित पूरे जीवनचक्र को विनियमित करने का प्रयास करती है।
- मार्च 2022 में UNEA द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद संधि पर बातचीत शुरू हुई, जिसमें 175 देशों का समर्थन प्राप्त था।
- भारत ने संधि में 'सर्कुलर इकोनॉमी' और 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' (EPR) जैसे सिद्धांतों को शामिल करने का पुरजोर समर्थन किया है।
- अंतर-सरकारी वार्ता समिति (INC) की विभिन्न बैठकें (INC-1, INC-2, INC-3, INC-4) संधि के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित की गई हैं।
- संधि का उद्देश्य 2040 तक प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना है और यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- यह संधि समुद्री जीवन, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ एक स्थायी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण है।
- 2026 में संधि के कार्यान्वयन के रोडमैप पर चर्चा होने की उम्मीद है, जो वैश्विक पर्यावरण शासन में एक मील का पत्थर है।
Practice Questions
Q1. वैश्विक प्लास्टिक संधि किस अंतरराष्ट्रीय संगठन के तत्वावधान में विकसित की जा रही है?
- विश्व व्यापार संगठन (WTO)
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
Explanation: वैश्विक प्लास्टिक संधि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्वावधान में विकसित की जा रही है। UNEP पर्यावरण के मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र की अग्रणी संस्था है।
Q2. वैश्विक प्लास्टिक संधि का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- केवल समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करना
- प्लास्टिक के उत्पादन को दोगुना करना
- प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र को विनियमित करके प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना
- प्लास्टिक के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना
Explanation: इस संधि का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक के उत्पादन से लेकर निपटान तक, यानी इसके पूरे जीवनचक्र को विनियमित करके प्लास्टिक प्रदूषण के वैश्विक संकट से निपटना है।
Q3. भारत ने वैश्विक प्लास्टिक संधि में किन प्रमुख सिद्धांतों को शामिल करने का समर्थन किया है?
- केवल एकल-उपयोग प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध
- सर्कुलर इकोनॉमी और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)
- प्लास्टिक निर्यात को बढ़ावा देना
- प्लास्टिक उत्पादन में कोई बदलाव नहीं
Explanation: भारत ने संधि में 'सर्कुलर इकोनॉमी' (चक्रीय अर्थव्यवस्था) और 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' (EPR) जैसे सिद्धांतों को शामिल करने का पुरजोर समर्थन किया है, जो प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में उत्पादकों की जिम्मेदारी को बढ़ाते हैं।
Q4. वैश्विक प्लास्टिक संधि पर बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव कब और किस मंच पर अपनाया गया था?
- मार्च 2020, संयुक्त राष्ट्र महासभा में
- मार्च 2022, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA) में
- नवंबर 2021, COP26 में
- अप्रैल 2023, G7 शिखर सम्मेलन में
Explanation: मार्च 2022 में नैरोबी, केन्या में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA) के पांचवें सत्र (UNEA-5) में एक अंतरराष्ट्रीय, कानूनी रूप से बाध्यकारी प्लास्टिक संधि पर बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव अपनाया गया था।
Q5. संधि के कार्यान्वयन के लिए रोडमैप पर चर्चा किस वर्ष होने की उम्मीद है?
- 2024
- 2025
- 2026
- 2027
Explanation: संधि के मसौदे को अंतिम रूप देने के बाद, 2026 में इसके कार्यान्वयन के लिए एक रोडमैप पर चर्चा और योजना बनाने की उम्मीद है, जो इसे लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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