हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना और भारत की जल सुरक्षा: नीतिगत चुनौतियां
जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे उत्तर भारत की जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए 'नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम' (NMSHE) के तहत नई कार्ययोजना तैयार की है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- हिमालयी ग्लेशियर एशिया की प्रमुख नदियों के स्रोत हैं।
- ग्लोबल वार्मिंग ग्लेशियरों के पिघलने का मुख्य कारण है।
- GLOFs (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स) हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
- NMSHE, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए एक प्रमुख मिशन है।
- हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए सतत विकास आवश्यक है।
- भारत ने आपदा प्रबंधन के लिए NDMA के माध्यम से विशेष योजनाएं बनाई हैं।
- जल सुरक्षा के लिए ग्लेशियरों का संरक्षण अनिवार्य है।
- हिमालयी राज्यों में जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।
- पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक सहयोग का आधार है।
- भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
Why In News
हाल ही में जारी एक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की दर पिछले दशक की तुलना में 20% अधिक हो गई है। इसके परिणामस्वरूप ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) का खतरा बढ़ गया है, जिसने नीति निर्माताओं का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।
Syllabus Connection
छात्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र और आपदा प्रबंधन के सिद्धांतों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना | जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा का अंतर्संबंध |
| क्यों | ग्लोबल वार्मिंग | पारिस्थितिक असंतुलन और नीतिगत विफलताएं |
| कैसे | NMSHE और NDMA नीतियां | अनुकूलन और शमन रणनीतियों का महत्व |
| प्रभाव | GLOFs और जल संकट | सतत विकास और हिमालयी सुरक्षा |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 12–20 | Environment and Ecology is a separate section in UPSC Prelims. GS-III includes environment, climate change, and disaster management. |
| State PCS / PSC | High | 5–8 | State PCS papers test both central environment policy and state-specific conservation achievements. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | National parks, Ramsar sites, pollution levels, and climate summits appear in SSC GK. |
Key Facts to Remember: हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना और भारत की जल सुरक्षा: नीतिगत चुनौतियां
- हिमालयी ग्लेशियर एशिया की प्रमुख नदियों के स्रोत हैं।
- ग्लोबल वार्मिंग ग्लेशियरों के पिघलने का मुख्य कारण है।
- GLOFs (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स) हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
- NMSHE, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए एक प्रमुख मिशन है।
- हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए सतत विकास आवश्यक है।
- भारत ने आपदा प्रबंधन के लिए NDMA के माध्यम से विशेष योजनाएं बनाई हैं।
- जल सुरक्षा के लिए ग्लेशियरों का संरक्षण अनिवार्य है।
- हिमालयी राज्यों में जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।
- पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक सहयोग का आधार है।
- भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
Practice Questions
Q1. हिमालय को 'दुनिया का तीसरा ध्रुव' क्यों कहा जाता है?
- अपनी ऊंचाई के कारण
- अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद बर्फ का सबसे बड़ा भंडार होने के कारण
- अपनी जैव विविधता के कारण
- अपनी सांस्कृतिक विरासत के कारण
Explanation: हिमालय में अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद दुनिया का सबसे बड़ा बर्फ का भंडार है, इसलिए इसे 'तीसरा ध्रुव' कहा जाता है।
Q2. GLOF का क्या अर्थ है?
- ग्लोबल लैंड आउटबर्स्ट फ्लड्स
- ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स
- ग्रेट लेक ओशन फ्लो
- ग्लोबल लेक ऑपरेशंस
Explanation: GLOF का अर्थ 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स' है, जो तब होता है जब ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलें अचानक टूट जाती हैं।
Q3. NMSHE का पूर्ण रूप क्या है?
- नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम
- नेशनल मिशन फॉर हिमालयन एनवायरनमेंट
- नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल हिमालय
- नेशनल मैनेजमेंट ऑफ हिमालयन इकोसिस्टम
Explanation: NMSHE का पूर्ण रूप 'नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम' है, जो जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना का हिस्सा है।
Q4. भारत का नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य किस वर्ष तक है?
- 2030
- 2050
- 2070
- 2047
Explanation: भारत ने 2070 तक नेट-जीरो (कार्बन तटस्थता) प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
Q5. हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
- पर्यटन
- जलवायु परिवर्तन
- कृषि
- खनन
Explanation: जलवायु परिवर्तन हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि यह ग्लेशियरों को तेजी से पिघला रहा है।
How to Prepare Environment for Government Exams — हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना और भारत की जल सुरक्ष…
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Climate news = policy news. Always note the government response to any environmental event — that's what UPSC Mains tests.
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