भारत में डिजिटल रुपया (e-Rupee) का विस्तार: वित्तीय समावेशन और भविष्य की राह
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा उपयोग के दायरे को व्यापक बनाने के लिए नई रणनीतियों की घोषणा की है। यह पहल नकद रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- डिजिटल रुपया (e-Rupee) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी एक कानूनी डिजिटल टेंडर है।
- यह ब्लॉकचेन आधारित लेजर तकनीक पर काम करता है।
- CBDC का उद्देश्य नकदी की तरह गुमनामी और सुरक्षा प्रदान करना है।
- प्रोग्रामेबल मनी फीचर का उपयोग सब्सिडी वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए किया जाएगा।
- ऑफलाइन लेनदेन की सुविधा खराब इंटरनेट वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
- UPI और CBDC के बीच मुख्य अंतर यह है कि CBDC स्वयं मुद्रा है, जबकि UPI एक भुगतान प्रणाली है।
- RBI अधिनियम, 1934 के तहत डिजिटल मुद्रा को विनियमित किया जाता है।
- भारत का लक्ष्य 2027 तक 50 मिलियन उपयोगकर्ताओं तक पहुंचना है।
- CBDC के दो मुख्य प्रकार हैं: थोक (W-CBDC) और खुदरा (R-CBDC)।
Why In News
13 जून 2026 को RBI ने एक नई रिपोर्ट जारी की है जिसमें ई-रुपया के ऑफलाइन ट्रांजैक्शन और प्रोग्रामेबल मनी फीचर्स को बड़े पैमाने पर लागू करने की रूपरेखा दी गई है। यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
Syllabus Connection
छात्रों को केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) की कार्यप्रणाली और पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली पर इसके प्रभाव को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | डिजिटल रुपया (CBDC) | वित्तीय समावेशन और मौद्रिक नीति पर प्रभाव |
| कौन | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) | केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता और डिजिटल अर्थव्यवस्था |
| क्यों | नकदी का डिजिटल विकल्प | पारदर्शिता और भ्रष्टाचार में कमी |
| कैसे | ब्लॉकचेन तकनीक | साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता चुनौतियां |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
Key Facts to Remember: भारत में डिजिटल रुपया (e-Rupee) का विस्तार: वित्तीय समावेशन और भविष्य की राह
- डिजिटल रुपया (e-Rupee) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी एक कानूनी डिजिटल टेंडर है।
- यह ब्लॉकचेन आधारित लेजर तकनीक पर काम करता है।
- CBDC का उद्देश्य नकदी की तरह गुमनामी और सुरक्षा प्रदान करना है।
- प्रोग्रामेबल मनी फीचर का उपयोग सब्सिडी वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए किया जाएगा।
- ऑफलाइन लेनदेन की सुविधा खराब इंटरनेट वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
- UPI और CBDC के बीच मुख्य अंतर यह है कि CBDC स्वयं मुद्रा है, जबकि UPI एक भुगतान प्रणाली है।
- RBI अधिनियम, 1934 के तहत डिजिटल मुद्रा को विनियमित किया जाता है।
- भारत का लक्ष्य 2027 तक 50 मिलियन उपयोगकर्ताओं तक पहुंचना है।
- CBDC के दो मुख्य प्रकार हैं: थोक (W-CBDC) और खुदरा (R-CBDC)।
Practice Questions
Q1. डिजिटल रुपया (e-Rupee) के संदर्भ में 'प्रोग्रामेबल मनी' का क्या अर्थ है?
- मुद्रा जिसे केवल ऑनलाइन शॉपिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है
- मुद्रा जिसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए उपयोग करने हेतु प्रतिबंधित किया जा सकता है
- मुद्रा जो केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है
- मुद्रा जो शेयर बाजार में निवेश के लिए अनिवार्य है
Explanation: प्रोग्रामेबल मनी का अर्थ है कि डिजिटल मुद्रा को इस तरह से कोड किया जा सकता है कि उसका उपयोग केवल विशिष्ट उद्देश्यों (जैसे सब्सिडी या शिक्षा) के लिए ही किया जा सके। यह सरकारी फंड के दुरुपयोग को रोकने में मदद करता है।
Q2. CBDC और UPI के बीच मुख्य तकनीकी अंतर क्या है?
- UPI एक मुद्रा है, CBDC भुगतान प्रणाली है
- CBDC बैंक खाते के बिना काम नहीं कर सकता
- UPI बैंक खातों के बीच संदेश प्रणाली है, जबकि CBDC स्वयं मुद्रा है
- दोनों में कोई अंतर नहीं है
Explanation: UPI एक भुगतान इंटरफेस है जो मौजूदा बैंक खातों का उपयोग करता है, जबकि CBDC केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल नकदी है जो सीधे केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट पर आधारित होती है।
Q3. डिजिटल रुपया का संचालन किस अधिनियम के तहत किया जाता है?
- भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
- बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949
- डिजिटल मुद्रा अधिनियम, 2022
Explanation: डिजिटल रुपया को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत कानूनी टेंडर के रूप में मान्यता दी गई है।
Q4. CBDC के दो मुख्य प्रकार कौन से हैं?
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय
- थोक (W-CBDC) और खुदरा (R-CBDC)
- सरकारी और निजी
- डिजिटल और भौतिक
Explanation: CBDC को दो श्रेणियों में बांटा गया है: थोक (Wholesale) जो वित्तीय संस्थानों के बीच उपयोग होता है, और खुदरा (Retail) जो आम जनता के लिए है।
Q5. डिजिटल रुपया के ऑफलाइन लेनदेन के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है?
- ब्लूटूथ
- नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC)
- उपग्रह संचार
- केवल क्यूआर कोड
Explanation: ऑफलाइन लेनदेन के लिए नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, जो बिना इंटरनेट के दो उपकरणों के बीच डेटा ट्रांसफर की अनुमति देता है।
How to Prepare Economy & Finance for Government Exams — भारत में डिजिटल रुपया (e-Rupee) का विस्तार: वित्त…
Track current Repo Rate, Inflation rate, and GDP growth. These three numbers appear in almost every banking exam.
Keep a running note of new schemes with their ministry, launch date, and target beneficiary group.
Focus on the Economic Survey and Union Budget highlights — these single documents generate dozens of exam questions.
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