भारत की नई विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का मध्यकालिक मूल्यांकन: निर्यात प्रोत्साहन और डिजिटल व्यापार पर जोर
भारत सरकार ने अपनी विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का मध्यकालिक मूल्यांकन जारी किया है, जिसमें 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नए प्रोत्साहन और रणनीतियाँ शामिल हैं। यह मूल्यांकन विशेष रूप से हरित ऊर्जा घटकों और डिजिटल सेवाओं जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है, साथ ही व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर भी जोर देता है। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना और 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूत करना है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत सरकार ने 12 मई, 2026 को विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का मध्यकालिक मूल्यांकन जारी किया।
- FTP 2023 का लक्ष्य 2030 तक भारत के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 850 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें वस्तु निर्यात 480 बिलियन अमेरिकी डॉलर और सेवा निर्यात 370 बिलियन अमेरिकी डॉलर शामिल है।
- मूल्यांकन में हरित ऊर्जा घटकों और डिजिटल सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
- 'व्यापार करने में आसानी' (Ease of Doing Business) को बेहतर बनाने के लिए दस्तावेज़ीकरण में कमी और सीमा शुल्क निकासी में तेजी लाने के उपाय किए गए हैं।
- 'डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स' पहल को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त धन आवंटित किया गया है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित हैं ताकि SEZ को अधिक लचीला बनाया जा सके।
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और शुल्क और करों की छूट पर योजना (RoDTEP) निर्यात प्रोत्साहन के प्रमुख साधन हैं।
- भारत यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ (EU) जैसे प्रमुख भागीदारों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है।
- यह नीति 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है।
Why In News
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 12 मई, 2026 को विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 के मध्यकालिक मूल्यांकन की घोषणा की है। यह मूल्यांकन वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत के निर्यात प्रदर्शन की समीक्षा करने और 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई रणनीतियों और प्रोत्साहन को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Syllabus Connection
यह लेख भारत की विदेश व्यापार नीति, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं, मुक्त व्यापार समझौतों और वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति से संबंधित है। छात्रों को व्यापार नीति के सिद्धांतों, इसके आर्थिक प्रभावों और विभिन्न सरकारी योजनाओं को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| नीति का नाम | विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 | गतिशील नीति ढाँचा, प्रोत्साहन से सुविधा-आधारित दृष्टिकोण की ओर बदलाव। |
| निर्यात लक्ष्य | 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर | वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना, 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य से जुड़ाव। |
| प्रमुख फोकस | हरित ऊर्जा घटक, डिजिटल सेवाएं | उच्च मूल्य-वर्धित क्षेत्रों में विविधीकरण, भविष्य की वैश्विक मांगों के अनुरूप। |
| संबंधित योजनाएं | RoDTEP, PLI, EPCG, SEIS | निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना। |
| वैश्विक संदर्भ | FTA वार्ता (UK, EU), WTO | भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच व्यापार लचीलापन, बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में भारत की भूमिका। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| State PCS / PSC | High | 4–8 | State budget, MSME, agriculture policy, and banking data are common in state PCS papers. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Medium | 2–3 | Railway papers focus on budget allocations, flagship schemes, and GDP milestones. |
Key Facts to Remember: भारत की नई विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का मध्यकालिक मूल्यांकन: निर्यात प्रोत्साहन और डिजिटल व्यापार पर जोर
- भारत सरकार ने 12 मई, 2026 को विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का मध्यकालिक मूल्यांकन जारी किया।
- FTP 2023 का लक्ष्य 2030 तक भारत के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 850 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें वस्तु निर्यात 480 बिलियन अमेरिकी डॉलर और सेवा निर्यात 370 बिलियन अमेरिकी डॉलर शामिल है।
- मूल्यांकन में हरित ऊर्जा घटकों और डिजिटल सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
- 'व्यापार करने में आसानी' (Ease of Doing Business) को बेहतर बनाने के लिए दस्तावेज़ीकरण में कमी और सीमा शुल्क निकासी में तेजी लाने के उपाय किए गए हैं।
- 'डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स' पहल को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त धन आवंटित किया गया है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित हैं ताकि SEZ को अधिक लचीला बनाया जा सके।
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और शुल्क और करों की छूट पर योजना (RoDTEP) निर्यात प्रोत्साहन के प्रमुख साधन हैं।
- भारत यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ (EU) जैसे प्रमुख भागीदारों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है।
- यह नीति 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है।
Practice Questions
Q1. विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का मुख्य लक्ष्य किस वर्ष तक भारत के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है?
- 2028
- 2030
- 2032
- 2025
Explanation: विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य 2030 तक भारत के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है। यह लक्ष्य भारत को वैश्विक व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने के लिए निर्धारित किया गया है।
Q2. FTP 2023-28 के मध्यकालिक मूल्यांकन में किन दो उच्च-विकास वाले क्षेत्रों के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है?
- पारंपरिक हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद
- पेट्रोलियम उत्पाद और रत्न एवं आभूषण
- हरित ऊर्जा घटक और डिजिटल सेवाएं
- कपड़ा और चमड़ा उत्पाद
Explanation: मध्यकालिक मूल्यांकन में हरित ऊर्जा घटकों (जैसे सौर पैनल) और डिजिटल सेवाओं (जैसे ITES, सॉफ्टवेयर विकास) को 'भविष्य के निर्यात इंजन' के रूप में पहचाना गया है। इन क्षेत्रों में भारत की क्षमता को देखते हुए, इन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सी योजना निर्यातकों को उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों और करों की प्रतिपूर्ति करती है जो निर्यातित उत्पादों के निर्माण में लगे होते हैं और जो किसी अन्य योजना के तहत वापस नहीं किए जाते हैं?
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना
- शुल्क मुक्त आयात प्राधिकरण (DFIA) योजना
- शुल्क और करों की छूट पर योजना (RoDTEP)
- निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) योजना
Explanation: RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) योजना निर्यातकों को उन अप्रत्यक्ष शुल्कों और करों की प्रतिपूर्ति करती है जो निर्यातित उत्पादों के निर्माण में लगते हैं और जो किसी अन्य योजना के तहत वापस नहीं किए जाते हैं। यह योजना निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद करती है।
Q4. वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात कितना रहा, जैसा कि FTP 2023-28 के मध्यकालिक मूल्यांकन में बताया गया है?
- 600 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 750 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 850 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 900 बिलियन अमेरिकी डॉलर
Explanation: मध्यकालिक मूल्यांकन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 850 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें वस्तु निर्यात 480 बिलियन अमेरिकी डॉलर और सेवा निर्यात 370 बिलियन अमेरिकी डॉलर शामिल था।
Q5. 'डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स' पहल का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- केवल बड़े शहरों से निर्यात को बढ़ावा देना
- ज़िला स्तर पर निर्यात क्षमता का दोहन करना और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुँचाना
- आयात को बढ़ावा देने के लिए ज़िलों में विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करना
- केवल कृषि उत्पादों के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करना
Explanation: 'डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स' पहल का उद्देश्य भारत के प्रत्येक ज़िले में निर्यात क्षमता की पहचान करना और उसे बढ़ावा देना है। यह स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने में मदद करता है, जिससे ज़िला स्तर पर आर्थिक विकास और रोजगार सृजन होता है।
How to Prepare Economy & Finance for Government Exams — भारत की नई विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का मध…
Track current Repo Rate, Inflation rate, and GDP growth. These three numbers appear in almost every banking exam.
Keep a running note of new schemes with their ministry, launch date, and target beneficiary group.
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