भारत ने 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' में 120वें सदस्य के रूप में 'कांगो गणराज्य' का स्वागत किया
भारत ने 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) में 120वें सदस्य के रूप में 'कांगो गणराज्य' का स्वागत किया है। यह घोषणा विदेश मंत्रालय द्वारा की गई, जिसमें बताया गया कि कांगो गणराज्य के राजदूत ने ISA के संस्थापक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ISA के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति मिलेगी।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत ने 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) में 120वें सदस्य के रूप में 'कांगो गणराज्य' का स्वागत किया।
- कांगो गणराज्य के राजदूत, महामहिम श्री रेमंड सर्ज बैले ने नई दिल्ली में ISA के संस्थापक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- ISA की स्थापना 30 नवंबर, 2015 को पेरिस में COP21 के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा की गई थी।
- ISA का मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा, भारत में स्थित है।
- ISA का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण जुटाना है।
- 2020 में ISA के फ्रेमवर्क समझौते में संशोधन के बाद, संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश इसमें शामिल हो सकते हैं।
- कांगो गणराज्य का शामिल होना अफ्रीका में सौर ऊर्जा के विकास को गति देगा।
- ISA की प्रमुख पहल 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) है।
- ISA वैश्विक जलवायु कार्रवाई और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ISA संयुक्त राष्ट्र के बाहर भारत में स्थापित होने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय संधि-आधारित संगठन है।
Why In News
भारत ने 12 मई, 2026 को घोषणा की कि 'कांगो गणराज्य' 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) का 120वां सदस्य बन गया है। कांगो गणराज्य के राजदूत ने नई दिल्ली में ISA के संस्थापक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे यह संगठन वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत की वैश्विक पहल, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के विस्तार और जलवायु परिवर्तन तथा स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में इसकी भूमिका से संबंधित है। छात्रों को ISA की संरचना, उद्देश्यों और भारत की विदेश नीति में इसके महत्व का अध्ययन करना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है | कांगो गणराज्य ISA का 120वां सदस्य बना। | ISA के सार्वभौमिकरण और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के प्रयासों को मजबूत करना। |
| कब और किसने | 12 मई, 2026 को भारत ने घोषणा की, कांगो राजदूत ने हस्ताक्षर किए। | भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रतिबद्धता का प्रतीक। |
| ISA का उद्देश्य | सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, लागत कम करना, वित्तपोषण जुटाना। | ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान। |
| महत्व | अफ्रीका में सौर ऊर्जा विकास को बढ़ावा, वैश्विक जलवायु कार्रवाई। | वैश्विक दक्षिण में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाना और 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' को साकार करना। |
| भारत की भूमिका | संस्थापक सदस्य, मुख्यालय मेजबान, OSOWOG पहल का प्रस्तावक। | भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना और वैश्विक चुनौतियों के लिए सामूहिक समाधान की वकालत। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 10–20 | International relations is a core GS-II topic for UPSC. Bilateral agreements, multilateral bodies, and geopolitics are essential. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | State PCS papers test India's role in international forums and bilateral trade ties. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | International summits, treaties, and India's bilateral relations appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | G20, IMF/World Bank decisions, and global trade events are tested in banking exams. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Medium | 2–4 | Summits, UN resolutions, and India's foreign policy are included in Railway GK. |
Key Facts to Remember: भारत ने 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' में 120वें सदस्य के रूप में 'कांगो गणराज्य' का स्वागत किया
- भारत ने 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) में 120वें सदस्य के रूप में 'कांगो गणराज्य' का स्वागत किया।
- कांगो गणराज्य के राजदूत, महामहिम श्री रेमंड सर्ज बैले ने नई दिल्ली में ISA के संस्थापक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- ISA की स्थापना 30 नवंबर, 2015 को पेरिस में COP21 के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा की गई थी।
- ISA का मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा, भारत में स्थित है।
- ISA का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण जुटाना है।
- 2020 में ISA के फ्रेमवर्क समझौते में संशोधन के बाद, संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश इसमें शामिल हो सकते हैं।
- कांगो गणराज्य का शामिल होना अफ्रीका में सौर ऊर्जा के विकास को गति देगा।
- ISA की प्रमुख पहल 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) है।
- ISA वैश्विक जलवायु कार्रवाई और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ISA संयुक्त राष्ट्र के बाहर भारत में स्थापित होने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय संधि-आधारित संगठन है।
Practice Questions
Q1. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का 120वां सदस्य देश कौन सा बना है?
- नाइजीरिया
- कांगो गणराज्य
- इथियोपिया
- मिस्र
Explanation: भारत ने 12 मई, 2026 को घोषणा की कि 'कांगो गणराज्य' अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का 120वां सदस्य बन गया है। कांगो गणराज्य के राजदूत ने नई दिल्ली में ISA के संस्थापक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
Q2. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की स्थापना किस वर्ष और किस सम्मेलन के दौरान हुई थी?
- 2010, COP16
- 2012, रियो+20
- 2015, COP21
- 2018, COP24
Explanation: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की स्थापना 30 नवंबर, 2015 को पेरिस में COP21 (जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के पक्षकारों का 21वां सम्मेलन) के दौरान हुई थी। इसे भारत और फ्रांस ने मिलकर लॉन्च किया था।
Q3. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय किस भारतीय शहर में स्थित है?
- बेंगलुरु
- मुंबई
- गुरुग्राम
- पुणे
Explanation: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा, भारत में स्थित है। यह संयुक्त राष्ट्र के बाहर भारत में स्थापित होने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय संधि-आधारित संगठन है।
Q4. ISA की प्रमुख पहल 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना
- वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा को साझा करने के लिए एक ट्रांस-नेशनल ग्रिड बनाना
- विश्व भर में पेयजल उपलब्ध कराना
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों को सुरक्षित करना
Explanation: ISA की प्रमुख पहल 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा को साझा करने के लिए एक ट्रांस-नेशनल ग्रिड बनाना है। यह पहल सौर ऊर्जा के कुशल उपयोग और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
Q5. 2020 में ISA के फ्रेमवर्क समझौते में किए गए संशोधन का मुख्य प्रभाव क्या था?
- ISA का मुख्यालय बदल दिया गया
- केवल कर्क और मकर रेखा के बीच के देश ही सदस्य बन सकते थे
- संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश ISA में शामिल हो सकते थे
- ISA को भंग कर दिया गया
Explanation: 2020 में ISA के फ्रेमवर्क समझौते में संशोधन किया गया, जिससे संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश अब ISA में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले, सदस्यता केवल कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच स्थित देशों तक ही सीमित थी।
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