ISRO-NASA का संयुक्त 'अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन' (SREM) लॉन्च: भविष्य के अंतरिक्ष खनन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने संयुक्त रूप से 'अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन' (SREM) लॉन्च किया है। यह मिशन क्षुद्रग्रहों पर जल-बर्फ और अन्य मूल्यवान खनिजों की खोज और विश्लेषण पर केंद्रित है, जो भविष्य के अंतरिक्ष खनन और मानव अन्वेषण के लिए महत्वपूर्ण है। यह सहयोग अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती भूमिका और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी को दर्शाता है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO और NASA ने 12 मई, 2026 को संयुक्त रूप से 'अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन' (SREM) लॉन्च किया है।
- SREM का लक्ष्य पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रग्रह 'एरिस-7' पर जल-बर्फ और अन्य मूल्यवान खनिजों की खोज करना है।
- यह मिशन फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से स्पेसएक्स फाल्कन हेवी रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
- मिशन में एक ऑर्बिटर और एक लैंडर शामिल है, जो क्षुद्रग्रह की सतह का मानचित्रण और नमूना विश्लेषण करेगा।
- ISRO ने लैंडर के लिए उन्नत ड्रिलिंग प्रणाली और लेजर-प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS) विकसित किया है।
- NASA ने ऑर्बिटर के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर और न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर प्रदान किया है।
- SREM का उद्देश्य 'इन-सीटू संसाधन उपयोग' (ISRU) प्रौद्योगिकियों को विकसित करना है, जो भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह मिशन अंतरिक्ष खनन की अवधारणा को मजबूत करेगा और अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग पर अंतर्राष्ट्रीय बहस को बढ़ावा देगा।
- मिशन की कुल अनुमानित लागत लगभग 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें दोनों एजेंसियां समान रूप से योगदान कर रही हैं।
- भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 निजी भागीदारी को बढ़ावा देती है और SREM जैसे मिशन भारत को अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाएंगे।
Why In News
ISRO और NASA ने 12 मई, 2026 को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से अपने महत्वाकांक्षी 'अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन' (SREM) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह मिशन अंतरिक्ष में संसाधनों की खोज और उनके उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसने भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए नई संभावनाएं खोली हैं।
Syllabus Connection
यह लेख अंतरिक्ष अन्वेषण, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग (space resource utilization) और भारत की अंतरिक्ष नीति से संबंधित है। छात्रों को ISRO के मिशनों, NASA के साथ सहयोग और अंतरिक्ष खनन की अवधारणा को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| मिशन का नाम | अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन (SREM) | अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग (ISRU) की अवधारणा और भविष्य के मानव मिशनों पर प्रभाव। |
| लॉन्च तिथि | 12 मई, 2026 | अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते महत्व का प्रतीक। |
| सहयोगी एजेंसियां | ISRO और NASA | भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति और वैश्विक साझेदारी में भूमिका का प्रदर्शन। |
| लक्ष्य | क्षुद्रग्रह 'एरिस-7' पर जल-बर्फ और खनिजों की खोज | अंतरिक्ष खनन की व्यवहार्यता और इसके कानूनी, नैतिक निहितार्थों पर बहस। |
| तकनीकी योगदान | ISRO: ड्रिलिंग, LIBS; NASA: इमेजिंग, न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर | तकनीकी नवाचार और जटिल अंतरिक्ष मिशनों में विशेषज्ञता का आदान-प्रदान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
Key Facts to Remember: ISRO-NASA का संयुक्त 'अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन' (SREM) लॉन्च: भविष्य के अंतरिक्ष खनन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
- ISRO और NASA ने 12 मई, 2026 को संयुक्त रूप से 'अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन' (SREM) लॉन्च किया है।
- SREM का लक्ष्य पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रग्रह 'एरिस-7' पर जल-बर्फ और अन्य मूल्यवान खनिजों की खोज करना है।
- यह मिशन फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से स्पेसएक्स फाल्कन हेवी रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
- मिशन में एक ऑर्बिटर और एक लैंडर शामिल है, जो क्षुद्रग्रह की सतह का मानचित्रण और नमूना विश्लेषण करेगा।
- ISRO ने लैंडर के लिए उन्नत ड्रिलिंग प्रणाली और लेजर-प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS) विकसित किया है।
- NASA ने ऑर्बिटर के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर और न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर प्रदान किया है।
- SREM का उद्देश्य 'इन-सीटू संसाधन उपयोग' (ISRU) प्रौद्योगिकियों को विकसित करना है, जो भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह मिशन अंतरिक्ष खनन की अवधारणा को मजबूत करेगा और अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग पर अंतर्राष्ट्रीय बहस को बढ़ावा देगा।
- मिशन की कुल अनुमानित लागत लगभग 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें दोनों एजेंसियां समान रूप से योगदान कर रही हैं।
- भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 निजी भागीदारी को बढ़ावा देती है और SREM जैसे मिशन भारत को अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाएंगे।
Practice Questions
Q1. अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन (SREM) किन दो अंतरिक्ष एजेंसियों का एक संयुक्त मिशन है?
- ISRO और NASA
- ESA और Roscosmos
- JAXA और CNSA
- NASA और JAXA
Explanation: अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिशन (SREM) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के बीच एक संयुक्त परियोजना है। यह मिशन अंतरिक्ष में संसाधनों की खोज और उनके उपयोग पर केंद्रित है, जो अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Q2. SREM मिशन का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
- मंगल ग्रह पर जीवन की खोज करना
- क्षुद्रग्रहों पर जल-बर्फ और खनिजों का विश्लेषण करना
- सूर्य के कोरोना का अध्ययन करना
- बृहस्पति के चंद्रमाओं की भूवैज्ञानिक संरचना का मानचित्रण करना
Explanation: SREM मिशन का प्राथमिक लक्ष्य पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रग्रह 'एरिस-7' पर जल-बर्फ और अन्य मूल्यवान खनिजों की उपस्थिति का विस्तृत विश्लेषण करना है। यह भविष्य के अंतरिक्ष खनन और 'इन-सीटू संसाधन उपयोग' (ISRU) प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
Q3. SREM मिशन में ISRO द्वारा विकसित प्रमुख उपकरण कौन सा है?
- उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर
- न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर
- लेजर-प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS)
- गुरुत्वाकर्षण तरंग डिटेक्टर
Explanation: ISRO ने SREM मिशन के लैंडर के लिए एक उन्नत ड्रिलिंग प्रणाली और एक लेजर-प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS) विकसित किया है। LIBS क्षुद्रग्रह की सतह की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने में मदद करेगा, जो मिशन के वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
Q4. इन-सीटू संसाधन उपयोग (ISRU) का क्या अर्थ है?
- अंतरिक्ष में उपग्रहों का निर्माण करना
- अंतरिक्ष में ही संसाधनों का पता लगाना, निकालना और उनका उपयोग करना
- पृथ्वी पर अंतरिक्ष संसाधनों का आयात करना
- अंतरिक्ष पर्यटन को बढ़ावा देना
Explanation: इन-सीटू संसाधन उपयोग (ISRU) का अर्थ है अंतरिक्ष में ही संसाधनों का पता लगाना, निकालना और उनका उपयोग करना। यह अवधारणा भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पृथ्वी से भारी मात्रा में सामग्री ले जाने की आवश्यकता को कम करती है, जिससे अंतरिक्ष यात्रा अधिक टिकाऊ और लागत प्रभावी बनती है।
Q5. किस भारतीय नीति ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया है, जो SREM जैसे मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है?
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023
- राष्ट्रीय जल नीति 2012
- राष्ट्रीय कृषि नीति 2000
Explanation: भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। यह नीति ISRO को अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देती है, जबकि निजी क्षेत्र वाणिज्यिक परिचालन संभालता है, जिससे SREM जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए सहयोग और संसाधन जुटाना आसान होता है।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO-NASA का संयुक्त 'अंतरिक्ष संसाधन अन्वेषण मिश…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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