इसरो (ISRO) का शुक्रयान-1 मिशन: प्रक्षेपण की नई तारीख घोषित
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्र ग्रह के अध्ययन के लिए अपने पहले मिशन 'शुक्रयान-1' की नई समयरेखा साझा की है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- शुक्रयान-1, इसरो का शुक्र ग्रह के अध्ययन हेतु पहला मिशन है, जिसके 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में लॉन्च होने की उम्मीद है।
- यह मिशन शुक्र के अत्यधिक गर्म और जहरीले वायुमंडल, भूविज्ञान और सतह के नीचे की संरचना का गहन अध्ययन करेगा।
- शुक्र को 'पृथ्वी का जुड़वां ग्रह' कहा जाता है, लेकिन इसका वातावरण अत्यधिक ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण 462 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहता है।
- मिशन का उद्देश्य यह समझना है कि शुक्र का वातावरण इतना चरम कैसे विकसित हुआ, जो पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन को समझने में सहायक हो सकता है।
- शुक्रयान-1 में 10 से अधिक वैज्ञानिक पेलोड शामिल होंगे, जिनमें विभिन्न प्रकार के सेंसर और स्पेक्ट्रोमीटर शामिल हैं।
- इस मिशन का अनुमानित बजट लगभग ₹750 करोड़ है।
- यह मिशन इसरो के मंगलयान (2013) और चंद्रयान (2008, 2019) जैसे सफल अंतरग्रहीय मिशनों की श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण कदम है।
- शुक्रयान-1 भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा और STEM शिक्षा को बढ़ावा देगा।
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: इसरो (ISRO) का शुक्रयान-1 मिशन: प्रक्षेपण की नई तारीख घोषित
- शुक्रयान-1, इसरो का शुक्र ग्रह के अध्ययन हेतु पहला मिशन है, जिसके 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में लॉन्च होने की उम्मीद है।
- यह मिशन शुक्र के अत्यधिक गर्म और जहरीले वायुमंडल, भूविज्ञान और सतह के नीचे की संरचना का गहन अध्ययन करेगा।
- शुक्र को 'पृथ्वी का जुड़वां ग्रह' कहा जाता है, लेकिन इसका वातावरण अत्यधिक ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण 462 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहता है।
- मिशन का उद्देश्य यह समझना है कि शुक्र का वातावरण इतना चरम कैसे विकसित हुआ, जो पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन को समझने में सहायक हो सकता है।
- शुक्रयान-1 में 10 से अधिक वैज्ञानिक पेलोड शामिल होंगे, जिनमें विभिन्न प्रकार के सेंसर और स्पेक्ट्रोमीटर शामिल हैं।
- इस मिशन का अनुमानित बजट लगभग ₹750 करोड़ है।
- यह मिशन इसरो के मंगलयान (2013) और चंद्रयान (2008, 2019) जैसे सफल अंतरग्रहीय मिशनों की श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण कदम है।
- शुक्रयान-1 भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा और STEM शिक्षा को बढ़ावा देगा।
Practice Questions
Q1. इसरो के शुक्रयान-1 मिशन के प्रक्षेपण की अनुमानित समय-सीमा क्या है?
- 2025 के मध्य
- 2026 के अंत
- 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत
- 2030 की शुरुआत
Explanation: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने घोषणा की है कि शुक्र ग्रह के अध्ययन के लिए 'शुक्रयान-1' मिशन को 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में लॉन्च करने की योजना है।
Q2. शुक्र ग्रह को अक्सर पृथ्वी का 'जुड़वां ग्रह' क्यों कहा जाता है?
- क्योंकि दोनों ग्रहों पर जीवन मौजूद है।
- क्योंकि दोनों ग्रहों का आकार और द्रव्यमान लगभग समान है।
- क्योंकि दोनों ग्रहों पर पानी की प्रचुरता है।
- क्योंकि दोनों ग्रह सूर्य से समान दूरी पर स्थित हैं।
Explanation: शुक्र को पृथ्वी का 'जुड़वां ग्रह' कहा जाता है क्योंकि इसके आकार, द्रव्यमान और घनत्व में पृथ्वी से काफी समानताएं हैं, हालांकि इसका वातावरण अत्यधिक भिन्न और जीवन के लिए अनुपयुक्त है।
Q3. शुक्रयान-1 मिशन का एक प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्य क्या है?
- शुक्र पर जीवन की खोज करना।
- शुक्र के वायुमंडल के अत्यधिक गर्म और जहरीले होने के कारणों का अध्ययन करना।
- शुक्र के चंद्रमाओं का पता लगाना।
- शुक्र के चारों ओर एक स्थायी मानव बस्ती स्थापित करना।
Explanation: शुक्रयान-1 मिशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह समझना है कि शुक्र का वातावरण इतना चरम कैसे विकसित हुआ, जो पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन को समझने में भी प्रासंगिक है।
Q4. शुक्र ग्रह का सतह का तापमान औसतन कितना होता है, जो इसे सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह बनाता है?
- लगभग 150 डिग्री सेल्सियस
- लगभग 250 डिग्री सेल्सियस
- लगभग 462 डिग्री सेल्सियस
- लगभग 600 डिग्री सेल्सियस
Explanation: शुक्र ग्रह का सतह का तापमान औसतन लगभग 462 डिग्री सेल्सियस (864 डिग्री फारेनहाइट) होता है, जो मुख्य रूप से इसके घने कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण द्वारा उत्पन्न तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण होता है।
Q5. शुक्रयान-1 मिशन में कितने से अधिक वैज्ञानिक पेलोड शामिल होने की उम्मीद है?
- 5
- 7
- 10
- 15
Explanation: शुक्रयान-1 मिशन को उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों से लैस किया जाएगा, जिसमें 10 से अधिक वैज्ञानिक पेलोड शामिल होने की उम्मीद है, जो शुक्र के वातावरण और सतह का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — इसरो (ISRO) का शुक्रयान-1 मिशन: प्रक्षेपण की नई त…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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