ISRO का शुक्रयान-1 मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों की खोज
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्र ग्रह के वातावरण का अध्ययन करने के लिए अपने महत्वाकांक्षी मिशन 'शुक्रयान-1' की घोषणा की है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO का शुक्र मिशन 'शुक्रयान-1' शुक्र के वातावरण और सतह का अध्ययन करेगा।
- शुक्रयान-1 को GSLV Mk II या LVM3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
- मिशन का लक्ष्य सल्फ्यूरिक एसिड के बादल और ज्वालामुखीय गतिविधियों का विश्लेषण करना है।
- शुक्र का अध्ययन पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन को समझने में सहायक हो सकता है।
- शुक्र ग्रह का औसत सतह तापमान लगभग 462°C है।
- शुक्र के वायुमंडल में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (96.5%) है।
- मिशन में अंतरराष्ट्रीय पेलोड शामिल होंगे, जो वैश्विक सहयोग को दर्शाते हैं।
- शुक्र को पृथ्वी की 'जुड़वां बहन' कहा जाता है, लेकिन इसकी परिस्थितियाँ अत्यंत भिन्न हैं।
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: ISRO का शुक्रयान-1 मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों की खोज
- ISRO का शुक्र मिशन 'शुक्रयान-1' शुक्र के वातावरण और सतह का अध्ययन करेगा।
- शुक्रयान-1 को GSLV Mk II या LVM3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
- मिशन का लक्ष्य सल्फ्यूरिक एसिड के बादल और ज्वालामुखीय गतिविधियों का विश्लेषण करना है।
- शुक्र का अध्ययन पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन को समझने में सहायक हो सकता है।
- शुक्र ग्रह का औसत सतह तापमान लगभग 462°C है।
- शुक्र के वायुमंडल में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (96.5%) है।
- मिशन में अंतरराष्ट्रीय पेलोड शामिल होंगे, जो वैश्विक सहयोग को दर्शाते हैं।
- शुक्र को पृथ्वी की 'जुड़वां बहन' कहा जाता है, लेकिन इसकी परिस्थितियाँ अत्यंत भिन्न हैं।
Practice Questions
Q1. ISRO के आगामी शुक्र मिशन का नाम क्या है?
- मंगलयान-2
- चंद्रयान-4
- शुक्रयान-1
- गगनयान
Explanation: ISRO का शुक्र ग्रह के अध्ययन के लिए नियोजित मिशन 'शुक्रयान-1' है। यह मिशन शुक्र के वातावरण और सतह की विस्तृत जानकारी जुटाएगा।
Q2. शुक्रयान-1 मिशन को किस भारतीय रॉकेट से लॉन्च किए जाने की योजना है?
- PSLV-XL
- GSLV Mk II या LVM3
- SSLV
- GSLV Mk III
Explanation: ISRO ने शुक्रयान-1 को लॉन्च करने के लिए GSLV Mk II या LVM3 जैसे शक्तिशाली रॉकेटों का उपयोग करने की योजना बनाई है, जो मिशन की भारी पेलोड क्षमता को दर्शाता है।
Q3. शुक्र ग्रह का औसत सतह तापमान लगभग कितना है, जो इसे सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह बनाता है?
- 150°C
- 250°C
- 462°C
- 600°C
Explanation: शुक्र ग्रह का औसत सतह तापमान लगभग 462 डिग्री सेल्सियस (864 डिग्री फारेनहाइट) है, जो इसके घने कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण के कारण होने वाले तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव का परिणाम है।
Q4. शुक्रयान-1 मिशन का एक प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्य क्या है?
- मंगल पर जीवन की खोज करना
- शुक्र के सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों और ज्वालामुखीय गतिविधियों का अध्ययन करना
- चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज करना
- सौर मंडल के बाहरी ग्रहों का अध्ययन करना
Explanation: शुक्रयान-1 मिशन का एक मुख्य उद्देश्य शुक्र के सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों की परत और ग्रह की सतह पर ज्वालामुखीय गतिविधियों के प्रमाणों का विस्तृत अध्ययन करना है।
Q5. शुक्र ग्रह को अक्सर पृथ्वी की 'जुड़वां बहन' क्यों कहा जाता है, भले ही इसकी परिस्थितियाँ अत्यंत भिन्न हों?
- क्योंकि दोनों ग्रहों पर जीवन की समान संभावनाएँ हैं।
- क्योंकि दोनों ग्रहों का आकार और द्रव्यमान लगभग समान है।
- क्योंकि दोनों ग्रहों पर पानी की प्रचुरता है।
- क्योंकि दोनों ग्रहों पर वायुमंडल की संरचना समान है।
Explanation: शुक्र को पृथ्वी की 'जुड़वां बहन' कहा जाता है क्योंकि इसका आकार, द्रव्यमान और घनत्व पृथ्वी के समान है। हालांकि, इसका घना कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण और अत्यधिक उच्च तापमान इसे पृथ्वी से बहुत अलग बनाते हैं।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO का शुक्रयान-1 मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों की…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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