ISRO का 'पृथ्वी अवलोकन उपग्रह-4' (EOS-4) का सफल प्रक्षेपण: जलवायु परिवर्तन निगरानी में मील का पत्थर
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 5 जून, 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने नवीनतम पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, EOS-4, का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह उपग्रह उन्नत इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपिक उपकरणों से लैस है, जो जलवायु परिवर्तन, कृषि निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा। यह प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 5 जून, 2026 को श्रीहरिकोटा से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-4 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- EOS-4 को PSLV-C60 प्रक्षेपण यान का उपयोग करके भू-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया।
- उपग्रह का वजन लगभग 2200 किलोग्राम है और इसका मिशन जीवनकाल 5 साल है।
- इसमें उन्नत मल्टी-स्पेक्ट्रल स्कैनर (AMS), हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग सेंसर (HIS) और थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर (TIRS) शामिल हैं।
- HIS उपकरण 256 स्पेक्ट्रल बैंड में डेटा एकत्र कर सकता है, जो खनिज मानचित्रण और फसल स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
- TIRS उपकरण शहरी ताप द्वीपों, ज्वालामुखी गतिविधि और ग्लेशियर पिघलने की निगरानी करेगा।
- EOS-4 से प्राप्त डेटा का उपयोग जलवायु परिवर्तन, कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के लिए किया जाएगा।
- यह उपग्रह भारत को वैश्विक जलवायु निगरानी प्रयासों में एक प्रमुख भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा।
- ISRO के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने मिशन की सफलता की घोषणा की।
- यह मिशन भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल का एक उदाहरण है।
- EOS-4 राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में योगदान देगा।
Why In News
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 5 जून, 2026 को अपने अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, EOS-4, का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। यह प्रक्षेपण ऐसे समय में हुआ है जब जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तेजी से बढ़ रहे हैं और सटीक पर्यावरणीय डेटा की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। EOS-4 भारत को वैश्विक जलवायु निगरानी प्रयासों में एक प्रमुख भूमिका निभाने और कृषि, जल संसाधन तथा आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने में सक्षम बनाएगा।
Syllabus Connection
यह समाचार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के महत्व और जलवायु परिवर्तन निगरानी में उनके अनुप्रयोगों से संबंधित है। छात्रों को ISRO के मिशनों, विभिन्न उपग्रह प्रणालियों और उनके राष्ट्रीय विकास में योगदान पर ध्यान देना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है | ISRO का पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-4 | जलवायु परिवर्तन निगरानी और सतत विकास लक्ष्यों में इसकी भूमिका |
| कब | 5 जून, 2026 को प्रक्षेपित | बढ़ते पर्यावरणीय खतरों के बीच इसकी समयबद्धता और प्रासंगिकता |
| प्रक्षेपण यान | PSLV-C60 | भारत की प्रक्षेपण क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन |
| प्रमुख उपकरण | AMS, HIS, TIRS | इन उपकरणों की तकनीकी क्षमताएं और उनके विशिष्ट अनुप्रयोग |
| महत्व | जलवायु, कृषि, आपदा प्रबंधन डेटा | राष्ट्रीय विकास, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और भारत की वैश्विक स्थिति पर प्रभाव |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Banking (IBPS / SBI) | Low | 1–2 | Occasionally tested via banking technology, fintech, or climate-science crossovers. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: ISRO का 'पृथ्वी अवलोकन उपग्रह-4' (EOS-4) का सफल प्रक्षेपण: जलवायु परिवर्तन निगरानी में मील का पत्थर
- ISRO ने 5 जून, 2026 को श्रीहरिकोटा से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-4 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- EOS-4 को PSLV-C60 प्रक्षेपण यान का उपयोग करके भू-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया।
- उपग्रह का वजन लगभग 2200 किलोग्राम है और इसका मिशन जीवनकाल 5 साल है।
- इसमें उन्नत मल्टी-स्पेक्ट्रल स्कैनर (AMS), हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग सेंसर (HIS) और थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर (TIRS) शामिल हैं।
- HIS उपकरण 256 स्पेक्ट्रल बैंड में डेटा एकत्र कर सकता है, जो खनिज मानचित्रण और फसल स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
- TIRS उपकरण शहरी ताप द्वीपों, ज्वालामुखी गतिविधि और ग्लेशियर पिघलने की निगरानी करेगा।
- EOS-4 से प्राप्त डेटा का उपयोग जलवायु परिवर्तन, कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के लिए किया जाएगा।
- यह उपग्रह भारत को वैश्विक जलवायु निगरानी प्रयासों में एक प्रमुख भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा।
- ISRO के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने मिशन की सफलता की घोषणा की।
- यह मिशन भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल का एक उदाहरण है।
- EOS-4 राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में योगदान देगा।
Practice Questions
Q1. ISRO द्वारा 5 जून, 2026 को प्रक्षेपित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का नाम क्या है?
- EOS-1
- EOS-2
- EOS-3
- EOS-4
Explanation: ISRO ने 5 जून, 2026 को अपने नवीनतम पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, EOS-4, का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह उपग्रह उन्नत इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपिक उपकरणों से लैस है, जो जलवायु परिवर्तन निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Q2. EOS-4 को किस प्रक्षेपण यान का उपयोग करके प्रक्षेपित किया गया?
- GSLV Mk-III
- PSLV-C60
- SSLV
- ASLV
Explanation: EOS-4 को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV-C60) के उन्नत संस्करण का उपयोग करके भू-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया। PSLV ISRO का एक विश्वसनीय और बहुमुखी प्रक्षेपण यान है।
Q3. EOS-4 में शामिल हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग सेंसर (HIS) कितने स्पेक्ट्रल बैंड में डेटा एकत्र कर सकता है?
- 64
- 128
- 256
- 512
Explanation: EOS-4 में शामिल हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग सेंसर (HIS) 256 स्पेक्ट्रल बैंड में डेटा एकत्र कर सकता है। यह क्षमता खनिज मानचित्रण, फसल स्वास्थ्य निगरानी और तटीय क्षेत्र अध्ययन के लिए अभूतपूर्व विवरण प्रदान करती है।
Q4. EOS-4 का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- अंतरिक्ष पर्यटन को बढ़ावा देना
- अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजना
- पृथ्वी की सतह, महासागरों और वायुमंडल की निगरानी करना
- अंतरिक्ष मलबे को हटाना
Explanation: EOS-4 का प्राथमिक उद्देश्य पृथ्वी की सतह, महासागरों और वायुमंडल की निगरानी करना है। यह उपग्रह जलवायु परिवर्तन, कृषि निगरानी, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
Q5. ISRO का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
- चेन्नई
- मुंबई
- बेंगलुरु
- नई दिल्ली
Explanation: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है। ISRO भारत का प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है, जो अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के लिए जिम्मेदार है।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO का 'पृथ्वी अवलोकन उपग्रह-4' (EOS-4) का सफल प…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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