पश्चिमी घाट में नई मेंढक प्रजाति की खोज: जैव विविधता में वृद्धि
वैज्ञानिकों ने हाल ही में पश्चिमी घाट के वर्षावनों में मेंढक की एक नई और दुर्लभ प्रजाति **'इंडिरान परमाक्री'** की खोज की है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के शोधकर्ताओं द्वारा की गई यह पहचान केरल के वायनाड क्षेत्र में हुई है और यह पश्चिमी घाट के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालती है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट में मेंढक की एक नई प्रजाति, **इंडिरान परमाक्री (Indirana paramakri)**, की खोज की है।
- यह खोज **जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI)** के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है।
- नई प्रजाति केरल के **वायनाड क्षेत्र** के वर्षावनों में पाई गई है।
- **इंडिरान** जीनस के मेंढक आमतौर पर पश्चिमी घाट में ही पाए जाते हैं, जो इनकी स्थानिक प्रकृति को दर्शाता है।
- यह प्रजाति अपने **अद्वितीय प्रजनन व्यवहार** के लिए जानी जाती है, जिसमें अंडे पत्तों पर दिए जाते हैं।
- पश्चिमी घाट भारत के **चार प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट** में से एक है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है।
- यह खोज पश्चिमी घाट की **समृद्ध और अभी तक अज्ञात जैव विविधता** को उजागर करती है।
- नई प्रजाति को **अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN)** की रेड लिस्ट में 'डेटा डेफिशिएंट' श्रेणी में सूचीबद्ध किया जा सकता है।
- यह खोज क्षेत्र में **संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने** की आवश्यकता पर बल देती है।
Why In News
जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) द्वारा पश्चिमी घाट में मेंढक की एक नई प्रजाति 'इंडिरान परमाक्री' की हालिया खोज ने इस क्षेत्र की अद्वितीय जैव विविधता को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। यह नई पहचान, जिसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है, भारत के समृद्ध उभयचर जीवों की सूची में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है और इसके संरक्षण की तात्कालिकता को उजागर करती है।
Syllabus Connection
छात्रों को भारत में जैव विविधता हॉटस्पॉट, विशेष रूप से पश्चिमी घाट के महत्व, स्थानिक प्रजातियों की अवधारणा और उनके संरक्षण के लिए सरकारी पहलों की समीक्षा करनी चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| खोजकर्ता | जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के शोधकर्ता | भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों की भूमिका और योगदान का विश्लेषण। |
| प्रजाति का नाम | इंडिरान परमाक्री (Indirana paramakri) | प्रजातियों के नामकरण की प्रक्रिया और जैव विविधता के दस्तावेजीकरण का महत्व। |
| खोज स्थल | पश्चिमी घाट, केरल का वायनाड क्षेत्र | पश्चिमी घाट की जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में भूमिका और संरक्षण चुनौतियाँ। |
| महत्व | नई स्थानिक प्रजाति, जैव विविधता वृद्धि | नई प्रजातियों की खोज का पारिस्थितिक संतुलन और संरक्षण रणनीतियों पर प्रभाव। |
| संरक्षण | IUCN स्थिति मूल्यांकन, पर्यावास सुरक्षा | जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों से जैव विविधता को खतरे तथा संरक्षण के उपाय। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 12–20 | Environment and Ecology is a separate section in UPSC Prelims. GS-III includes environment, climate change, and disaster management. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | National parks, Ramsar sites, pollution levels, and climate summits appear in SSC GK. |
| State PCS / PSC | High | 5–8 | State PCS papers test both central environment policy and state-specific conservation achievements. |
Key Facts to Remember: पश्चिमी घाट में नई मेंढक प्रजाति की खोज: जैव विविधता में वृद्धि
- वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट में मेंढक की एक नई प्रजाति, **इंडिरान परमाक्री (Indirana paramakri)**, की खोज की है।
- यह खोज **जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI)** के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है।
- नई प्रजाति केरल के **वायनाड क्षेत्र** के वर्षावनों में पाई गई है।
- **इंडिरान** जीनस के मेंढक आमतौर पर पश्चिमी घाट में ही पाए जाते हैं, जो इनकी स्थानिक प्रकृति को दर्शाता है।
- यह प्रजाति अपने **अद्वितीय प्रजनन व्यवहार** के लिए जानी जाती है, जिसमें अंडे पत्तों पर दिए जाते हैं।
- पश्चिमी घाट भारत के **चार प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट** में से एक है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है।
- यह खोज पश्चिमी घाट की **समृद्ध और अभी तक अज्ञात जैव विविधता** को उजागर करती है।
- नई प्रजाति को **अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN)** की रेड लिस्ट में 'डेटा डेफिशिएंट' श्रेणी में सूचीबद्ध किया जा सकता है।
- यह खोज क्षेत्र में **संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने** की आवश्यकता पर बल देती है।
Practice Questions
Q1. हाल ही में पश्चिमी घाट में खोजी गई मेंढक की नई प्रजाति का नाम क्या है?
- राना वायनाडेंसिस
- बुफो इंडिकस
- इंडिरान परमाक्री
- पॉलीपेडेट्स मालाबारिकस
Explanation: जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट के वायनाड क्षेत्र में मेंढक की एक नई प्रजाति की पहचान की है, जिसका नाम **इंडिरान परमाक्री** रखा गया है। यह नाम प्रसिद्ध भारतीय उभयचर वैज्ञानिक डॉ. परमजीत सिंह के सम्मान में दिया गया है।
Q2. इंडिरान परमाक्री प्रजाति की खोज भारत के किस क्षेत्र में की गई है?
- पूर्वी हिमालय
- सुंदरबन डेल्टा
- पश्चिमी घाट
- थार रेगिस्तान
Explanation: यह नई मेंढक प्रजाति भारत के **पश्चिमी घाट** में, विशेष रूप से केरल के वायनाड क्षेत्र के वर्षावनों में खोजी गई है। पश्चिमी घाट एक प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट है और अपनी अनूठी पारिस्थितिकी के लिए जाना जाता है।
Q3. पश्चिमी घाट को यूनेस्को द्वारा किस रूप में मान्यता प्राप्त है?
- विश्व विरासत शहर
- विश्व धरोहर स्थल
- बायोस्फीयर रिजर्व
- रामसर साइट
Explanation: पश्चिमी घाट को **यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल** के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है और वैश्विक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
Q4. मेंढक जैसे उभयचरों को अक्सर पर्यावरण स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक क्यों माना जाता है?
- वे केवल प्रदूषित पानी में रहते हैं।
- उनकी त्वचा पारगम्य होती है और वे पानी व भूमि दोनों पर निर्भर करते हैं।
- वे केवल ठंडे जलवायु में पाए जाते हैं।
- वे केवल मांसाहारी होते हैं।
Explanation: उभयचरों की त्वचा पारगम्य होती है और वे अपने जीवन चक्र के दौरान पानी और भूमि दोनों पर निर्भर रहते हैं। यह विशेषता उन्हें पर्यावरणीय परिवर्तनों, जैसे प्रदूषण और पर्यावास विनाश, के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है, जिससे वे पर्यावरण स्वास्थ्य के उत्कृष्ट संकेतक बन जाते हैं।
Q5. भारत में जैविक विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए कौन सा अधिनियम बनाया गया है?
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- जैविक विविधता अधिनियम, 2002
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980
Explanation: **जैविक विविधता अधिनियम, 2002** भारत की जैविक विविधता के संरक्षण, इसके घटकों के सतत उपयोग और जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों के उचित और न्यायसंगत बंटवारे के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करता है। अन्य अधिनियम भी पर्यावरण संरक्षण से संबंधित हैं लेकिन उनका मुख्य फोकस अलग है।
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