प्रोजेक्ट कुशा: भारत का स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 'प्रोजेक्ट कुशा' के तहत भारत के पहले स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। यह प्रणाली भारतीय वायु सेना की हवाई रक्षा क्षमताओं को एक नया आयाम प्रदान करेगी।
2-Minute Summary (TL;DR)
- प्रोजेक्ट कुशा DRDO द्वारा विकसित लंबी दूरी की स्वदेशी मिसाइल प्रणाली है।
- इसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर तक है।
- यह प्रणाली तीन अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग करती है।
- इसमें उन्नत AESA रडार तकनीक का उपयोग किया गया है।
- यह भारतीय वायु सेना के IACCS के साथ पूरी तरह एकीकृत है।
- यह स्टील्थ विमानों और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है।
- इसे 'मेक इन इंडिया' के तहत 'Buy (Indian-IDDM)' श्रेणी में मंजूरी मिली है।
- यह प्रणाली युद्ध के दौरान मोबाइल तैनाती के लिए उपयुक्त है।
- निजी क्षेत्र की कंपनियों को उत्पादन श्रृंखला में शामिल किया गया है।
- यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती प्रदान करती है।
- इसकी लागत विदेशी प्रणालियों की तुलना में काफी कम है।
- भविष्य में इसे भारतीय नौसेना के लिए भी विकसित किया जाएगा।
Why In News
जून 2026 में, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने प्रोजेक्ट कुशा के तहत मिसाइल प्रणालियों के बड़े पैमाने पर उत्पादन को मंजूरी दी है। यह निर्णय चीन और पाकिस्तान की ओर से बढ़ती हवाई खतरों की चुनौतियों को देखते हुए लिया गया है, जिससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
Syllabus Connection
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों का महत्व और हवाई रक्षा की रणनीतिक भूमिका।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | प्रोजेक्ट कुशा (LRSAM)। | स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का सामरिक महत्व। |
| क्यों | हवाई खतरों का मुकाबला करना। | रक्षा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता। |
| कौन | DRDO। | सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का रक्षा सहयोग। |
| कैसे | 350 किमी रेंज और AESA रडार। | नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता का एकीकरण। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 4–8 | UPSC focuses on strategic aspects: defence policy, Indo-Pacific, border issues, and bilateral defence deals. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | Defence acquisitions, military exercises, and appointments appear in SSC GK. |
Key Facts to Remember: प्रोजेक्ट कुशा: भारत का स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम
- प्रोजेक्ट कुशा DRDO द्वारा विकसित लंबी दूरी की स्वदेशी मिसाइल प्रणाली है।
- इसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर तक है।
- यह प्रणाली तीन अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग करती है।
- इसमें उन्नत AESA रडार तकनीक का उपयोग किया गया है।
- यह भारतीय वायु सेना के IACCS के साथ पूरी तरह एकीकृत है।
- यह स्टील्थ विमानों और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है।
- इसे 'मेक इन इंडिया' के तहत 'Buy (Indian-IDDM)' श्रेणी में मंजूरी मिली है।
- यह प्रणाली युद्ध के दौरान मोबाइल तैनाती के लिए उपयुक्त है।
- निजी क्षेत्र की कंपनियों को उत्पादन श्रृंखला में शामिल किया गया है।
- यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती प्रदान करती है।
- इसकी लागत विदेशी प्रणालियों की तुलना में काफी कम है।
- भविष्य में इसे भारतीय नौसेना के लिए भी विकसित किया जाएगा।
Practice Questions
Q1. प्रोजेक्ट कुशा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- समुद्री डकैती को रोकना
- लंबी दूरी की स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली विकसित करना
- अंतरिक्ष में उपग्रहों को नष्ट करना
- साइबर हमलों से रक्षा करना
Explanation: प्रोजेक्ट कुशा का मुख्य उद्देश्य भारत के लिए एक स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) प्रणाली विकसित करना है, जो 350 किलोमीटर तक के हवाई खतरों को बेअसर कर सके।
Q2. प्रोजेक्ट कुशा में किस प्रकार के रडार का उपयोग किया गया है?
- डॉप्लर रडार
- AESA रडार
- सिंथेटिक अपर्चर रडार
- पैसिव रडार
Explanation: प्रोजेक्ट कुशा में उन्नत AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार का उपयोग किया गया है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और उनकी पहचान करने में सक्षम है।
Q3. प्रोजेक्ट कुशा के तहत मिसाइल प्रणाली का विकास किस संस्था द्वारा किया गया है?
- ISRO
- HAL
- DRDO
- BHEL
Explanation: प्रोजेक्ट कुशा को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है, जो भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्था है।
Q4. प्रोजेक्ट कुशा को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 की किस श्रेणी में मंजूरी दी गई है?
- Buy (Global)
- Buy (Indian-IDDM)
- Leasing
- Strategic Partnership
Explanation: प्रोजेक्ट कुशा को 'Buy (Indian-IDDM)' श्रेणी में मंजूरी दी गई है, जिसका अर्थ है 'स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित'। यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप है।
Q5. प्रोजेक्ट कुशा की मारक क्षमता कितनी है?
- 100 किमी
- 250 किमी
- 350 किमी
- 500 किमी
Explanation: प्रोजेक्ट कुशा की अधिकतम मारक क्षमता 350 किलोमीटर है, जो इसे लंबी दूरी की हवाई रक्षा प्रणालियों की श्रेणी में रखती है।
How to Prepare Defence for Government Exams — प्रोजेक्ट कुशा: भारत का स्वदेशी लंबी दूरी की सतह…
For every military exercise, note: India + Partner country + Purpose (bilateral or multilateral). Questions are pattern-based.
Defence indigenization ('Atmanirbhar Bharat in Defence') is a high-priority topic for 2025–26. Focus on systems developed by DRDO or HAL.
Chiefs of defence services change periodically. Always keep the current CDS, Army Chief, Navy Chief, and Air Chief up to date.
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