भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान सुरक्षा के लिए 'प्रोजेक्ट कवच' दिशानिर्देश जारी किए: साइबर धोखाधड़ी पर कड़ा प्रहार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में बढ़ते डिजिटल भुगतान और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए 'प्रोजेक्ट कवच' (Project KAVACH) के तहत नए व्यापक सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। इसके तहत रीयल-टाइम फ्रॉड मॉनिटरिंग और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाया गया है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 'प्रोजेक्ट कवच' (Project KAVACH) लॉन्च किया है।
- इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ती साइबर वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन घोटालों पर लगाम लगाना है।
- नए दिशानिर्देशों के तहत, 10,000 रुपये से अधिक के सभी डिजिटल लेनदेन के लिए मल्टी-फैक्टर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा।
- यदि कोई ग्राहक अपना मोबाइल डिवाइस या सिम कार्ड बदलता है, तो उसके बैंकिंग ऐप पर 24 घंटे का कूलिंग पीरियड लागू होगा।
- आरबीआई बैंकों के बीच वास्तविक समय में समन्वय के लिए 'सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री एंड रिस्पांस प्लेटफॉर्म' (CFRRP) स्थापित करेगा।
- धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए 'गोल्डन ऑवर' (पहले 2 घंटे) के भीतर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि फंड को तुरंत फ्रीज किया जा सके।
- यदि बैंक की सुरक्षा चूक के कारण ग्राहक को नुकसान होता है, तो बैंक को 7 कार्य दिवसों के भीतर पूरी राशि वापस करनी होगी।
- यह पहल सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप है।
- आरबीआई की एआई-आधारित रीयल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम (RTFDS) संदिग्ध लेनदेन को तुरंत ब्लॉक करने में सक्षम होगी।
- यूपीआई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एनपीसीआई (NPCI) जल्द ही 'UPI कवच' फीचर पेश करेगा।
Why In News
13 जून 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मुंबई में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में 'प्रोजेक्ट कवच' के अंतिम कार्यान्वयन ढांचे की घोषणा की। हाल के महीनों में यूपीआई (UPI) और नेट बैंकिंग के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में आई अचानक तेजी को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने इन कड़े सुरक्षा मानकों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है।
Syllabus Connection
डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय समावेशन, साइबर सुरक्षा चुनौतियां और देश के वित्तीय बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखने में केंद्रीय बैंक (RBI) की नियामक भूमिका।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| What | आरबीआई का 'प्रोजेक्ट कवच' डिजिटल भुगतान सुरक्षा ढांचा है। | डिजिटल अर्थव्यवस्था में साइबर सुरक्षा और उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने के उपाय। |
| Key Rules | 10,000+ रुपये पर बायोमेट्रिक; 24 घंटे कूलिंग पीरियड। | वित्तीय समावेशन के साथ सुरक्षा संतुलन की आवश्यकता का विश्लेषण। |
| Platform | CFRRP (सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री एंड रिस्पांस प्लेटफॉर्म)। | अंतर-बैंक समन्वय और रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग का महत्व। |
| Liability | बैंक की गलती पर 7 दिनों में पूर्ण रिफंड। | उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण और बैंकों की जवाबदेही तय करना। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
| State PCS / PSC | High | 4–8 | State budget, MSME, agriculture policy, and banking data are common in state PCS papers. |
Key Facts to Remember: भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान सुरक्षा के लिए 'प्रोजेक्ट कवच' दिशानिर्देश जारी किए: साइबर धोखाधड़ी पर कड़ा प्रहार
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 'प्रोजेक्ट कवच' (Project KAVACH) लॉन्च किया है।
- इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ती साइबर वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन घोटालों पर लगाम लगाना है।
- नए दिशानिर्देशों के तहत, 10,000 रुपये से अधिक के सभी डिजिटल लेनदेन के लिए मल्टी-फैक्टर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा।
- यदि कोई ग्राहक अपना मोबाइल डिवाइस या सिम कार्ड बदलता है, तो उसके बैंकिंग ऐप पर 24 घंटे का कूलिंग पीरियड लागू होगा।
- आरबीआई बैंकों के बीच वास्तविक समय में समन्वय के लिए 'सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री एंड रिस्पांस प्लेटफॉर्म' (CFRRP) स्थापित करेगा।
- धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए 'गोल्डन ऑवर' (पहले 2 घंटे) के भीतर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि फंड को तुरंत फ्रीज किया जा सके।
- यदि बैंक की सुरक्षा चूक के कारण ग्राहक को नुकसान होता है, तो बैंक को 7 कार्य दिवसों के भीतर पूरी राशि वापस करनी होगी।
- यह पहल सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप है।
- आरबीआई की एआई-आधारित रीयल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम (RTFDS) संदिग्ध लेनदेन को तुरंत ब्लॉक करने में सक्षम होगी।
- यूपीआई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एनपीसीआई (NPCI) जल्द ही 'UPI कवच' फीचर पेश करेगा।
Practice Questions
Q1. हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट कवच' (Project KAVACH) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- कृषि ऋणों की माफी और नई सब्सिडी योजनाएं लागू करना
- डिजिटल भुगतान सुरक्षा को मजबूत करना और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना
- विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन के लिए नए नियम बनाना
- सरकारी बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करना
Explanation: प्रोजेक्ट कवच को आरबीआई द्वारा डिजिटल भुगतान प्रणालियों की सुरक्षा को बढ़ाने और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए शुरू किया गया है। इसके तहत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और कूलिंग पीरियड जैसे कड़े नियम लागू किए गए हैं।
Q2. 'प्रोजेक्ट कवच' के तहत, नया मोबाइल डिवाइस या सिम कार्ड बदलने पर मोबाइल बैंकिंग ऐप के लिए कितने समय का 'कूलिंग पीरियड' अनिवार्य किया गया है?
- 12 घंटे
- 24 घंटे
- 48 घंटे
- 72 घंटे
Explanation: नए नियमों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से डिवाइस या सिम कार्ड बदलने पर अगले 24 घंटे के लिए 'कूलिंग पीरियड' लागू होगा, ताकि अनधिकृत पहुंच को रोका जा सके।
Q3. प्रोजेक्ट कवच के अंतर्गत कितने रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन के लिए मल्टी-फैक्टर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है?
- 5,000 रुपये
- 10,000 रुपये
- 20,000 रुपये
- 50,000 रुपये
Explanation: आरबीआई ने सुरक्षा को कड़ा करते हुए 10,000 रुपये से अधिक के सभी डिजिटल भुगतानों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (जैसे फेस रिकग्निशन या फिंगरप्रिंट) का नियम बनाया है।
Q4. साइबर धोखाधड़ी के संदर्भ में 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) से क्या तात्पर्य है?
- धोखाधड़ी होने के बाद के पहले 2 घंटे, जिसमें त्वरित रिपोर्टिंग से फंड बचाया जा सकता है
- बैंकों में लेनदेन का वह समय जब सबसे अधिक ब्याज दरें मिलती हैं
- शेयर बाजार के खुलने का पहला घंटा
- आरबीआई द्वारा बैंकों को ऋण देने का विशेष समय
Explanation: डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में घटना के बाद के पहले 2 घंटे को 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है। इस अवधि में तुरंत रिपोर्ट करने पर बैंक और पुलिस मिलकर पैसे को दूसरे खाते में ट्रांसफर होने से रोक सकते हैं।
Q5. प्रोजेक्ट कवच के तहत बैंकों के बीच वास्तविक समय में धोखाधड़ी की जानकारी साझा करने के लिए किस प्लेटफॉर्म की स्थापना की जाएगी?
- सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री एंड रिस्पांस प्लेटफॉर्म (CFRRP)
- डिजिटल सुरक्षा पोर्टल (DSP)
- राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा मंच (NCSP)
- आरबीआई सुरक्षा ग्रिड (RSG)
Explanation: आरबीआई द्वारा 'सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री एंड रिस्पांस प्लेटफॉर्म' (CFRRP) की स्थापना की जा रही है, जो सभी वित्तीय संस्थानों को वास्तविक समय में धोखाधड़ी वाले खातों को ट्रैक करने और फंड फ्रीज करने में मदद करेगा।
How to Prepare Economy & Finance for Government Exams — भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान सुरक्षा के लि…
Track current Repo Rate, Inflation rate, and GDP growth. These three numbers appear in almost every banking exam.
Keep a running note of new schemes with their ministry, launch date, and target beneficiary group.
Focus on the Economic Survey and Union Budget highlights — these single documents generate dozens of exam questions.
Related Current Affairs
Test Your Knowledge on Today's Current Affairs
10 questions · 10 minutes · Based on today's GK updates. See how prepared you really are.
Start Daily Quiz