केरल में धूमधाम से मनाया गया 'त्रिशूर पूरम' उत्सव
हाथियों के भव्य जुलूस और पारंपरिक संगीत के साथ केरल का सबसे बड़ा मंदिर उत्सव 'त्रिशूर पूरम' संपन्न हुआ।
2-Minute Summary (TL;DR)
- त्रिशूर पूरम केरल का सबसे बड़ा और भव्य मंदिर उत्सव है, जो त्रिशूर के वडक्कुनाथन मंदिर में आयोजित होता है।
- इस उत्सव की शुरुआत 18वीं शताब्दी में कोच्चि के शासक महाराजा सक्तन थंपुरन ने की थी।
- यह उत्सव हाथियों के भव्य जुलूस, पारंपरिक 'चेंडा मेलम' संगीत और शानदार आतिशबाजी के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- उत्सव में पारामेक्कावु भगवती मंदिर और तिरुवम्बाडी श्री कृष्ण मंदिर प्रमुख रूप से भाग लेते हैं।
- 'कुडिमाट्टम' उत्सव का एक महत्वपूर्ण आकर्षण है, जिसमें हाथियों के बीच देव-विग्रहों का आदान-प्रदान होता है।
- यह उत्सव मलयालम कैलेंडर के 'मेषम' महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
- त्रिशूर पूरम केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है।
- वर्ष 2010 में, त्रिशूर पूरम को 'राष्ट्रीय उत्सव' का दर्जा प्रदान किया गया।
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 3–5 | Modern Indian history, freedom struggle, and cultural heritage appear in SSC CGL. |
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Ancient, medieval, and modern history form a full section in UPSC Prelims and GS-I Mains. |
| State PCS / PSC | High | 5–10 | Regional history is specifically tested in state exams — Maratha history in Maharashtra, etc. |
Key Facts to Remember: केरल में धूमधाम से मनाया गया 'त्रिशूर पूरम' उत्सव
- त्रिशूर पूरम केरल का सबसे बड़ा और भव्य मंदिर उत्सव है, जो त्रिशूर के वडक्कुनाथन मंदिर में आयोजित होता है।
- इस उत्सव की शुरुआत 18वीं शताब्दी में कोच्चि के शासक महाराजा सक्तन थंपुरन ने की थी।
- यह उत्सव हाथियों के भव्य जुलूस, पारंपरिक 'चेंडा मेलम' संगीत और शानदार आतिशबाजी के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- उत्सव में पारामेक्कावु भगवती मंदिर और तिरुवम्बाडी श्री कृष्ण मंदिर प्रमुख रूप से भाग लेते हैं।
- 'कुडिमाट्टम' उत्सव का एक महत्वपूर्ण आकर्षण है, जिसमें हाथियों के बीच देव-विग्रहों का आदान-प्रदान होता है।
- यह उत्सव मलयालम कैलेंडर के 'मेषम' महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
- त्रिशूर पूरम केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है।
- वर्ष 2010 में, त्रिशूर पूरम को 'राष्ट्रीय उत्सव' का दर्जा प्रदान किया गया।
Practice Questions
Q1. त्रिशूर पूरम उत्सव का आयोजन केरल के किस शहर में स्थित वडक्कुनाथन मंदिर में किया जाता है?
- कोच्चि
- त्रिवेंद्रम
- त्रिशूर
- कोझिकोड
Explanation: त्रिशूर पूरम उत्सव केरल के त्रिशूर शहर में स्थित वडक्कुनाथन मंदिर के परिसर में आयोजित होता है। यह केरल के सबसे प्रसिद्ध और भव्य उत्सवों में से एक है।
Q2. त्रिशूर पूरम उत्सव की शुरुआत किस शासक ने की थी?
- राजा मार्तंड वर्मा
- महाराजा सक्तन थंपुरन
- कृष्ण देवराय
- अशोक महान
Explanation: त्रिशूर पूरम उत्सव की शुरुआत 18वीं शताब्दी के अंत में कोच्चि साम्राज्य के शासक महाराजा सक्तन थंपुरन ने की थी। उन्होंने विभिन्न मंदिरों को एक साथ लाकर इस उत्सव को भव्य रूप दिया।
Q3. त्रिशूर पूरम उत्सव का मुख्य आकर्षण 'कुडिमाट्टम' क्या है?
- पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन
- संगीत वाद्ययंत्रों का वादन
- हाथियों के बीच देव-विग्रहों का आदान-प्रदान
- भव्य आतिशबाजी का प्रदर्शन
Explanation: 'कुडिमाट्टम' त्रिशूर पूरम का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें दो मुख्य हाथियों के झुंडों के बीच देव-विग्रहों का आदान-प्रदान किया जाता है। यह उत्सव का एक अत्यंत दर्शनीय हिस्सा है।
Q4. त्रिशूर पूरम उत्सव के दौरान बजने वाले पारंपरिक ड्रम वाद्य यंत्रों के समूह को क्या कहा जाता है?
- तबला
- ढोलक
- चेंडा मेलम
- मृदंगम
Explanation: त्रिशूर पूरम उत्सव के दौरान 'चेंडा मेलम' नामक पारंपरिक ड्रम वाद्य यंत्रों का समूह बजता है। इसकी लय और ध्वनि उत्सव के माहौल को और भी जोशीला बना देती है।
Q5. त्रिशूर पूरम को 'राष्ट्रीय उत्सव' का दर्जा किस वर्ष प्रदान किया गया?
- 2005
- 2010
- 2015
- 2018
Explanation: त्रिशूर पूरम की असाधारण भव्यता और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए, इसे वर्ष 2010 में 'राष्ट्रीय उत्सव' का दर्जा प्रदान किया गया। यह केरल के लिए एक गौरव का क्षण था।
How to Prepare History & Culture for Government Exams — केरल में धूमधाम से मनाया गया 'त्रिशूर पूरम' उत्सव
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