भारत और जापान के बीच 'समुद्र सेतु 2026' संयुक्त नौसैनिक अभ्यास: हिंद-प्रशांत में रणनीतिक सहयोग
भारत और जापान की नौसेनाओं ने 6 जून, 2026 को बंगाल की खाड़ी में 'समुद्र सेतु 2026' नामक एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया। यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने, अंतरसंचालनीयता बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, हवाई रक्षा और समुद्री टोही सहित विभिन्न जटिल युद्धाभ्यास शामिल हैं।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत और जापान के बीच 'समुद्र सेतु 2026' संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 6 जून, 2026 को शुरू हुआ।
- यह अभ्यास बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया जा रहा है।
- अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सहयोग और अंतरसंचालनीयता बढ़ाना है।
- इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW), हवाई रक्षा और समुद्री टोही जैसे जटिल युद्धाभ्यास शामिल हैं।
- भारतीय नौसेना के प्रमुख जहाजों में INS विक्रमादित्य और P-8I पोसाइडन शामिल हैं।
- जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF) के प्रमुख जहाजों में JS इझुमो और P-1 शामिल हैं।
- यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक मुक्त और खुले वातावरण को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- दोनों देश JIMEX और मालाबार अभ्यास जैसे अन्य समुद्री अभ्यासों में भी भाग लेते हैं।
- अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौता (ACSA) दोनों देशों के बीच रसद सहायता को सक्षम बनाता है।
Why In News
भारत और जापान ने 6 जून, 2026 को बंगाल की खाड़ी में अपना वार्षिक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'समुद्र सेतु 2026' शुरू किया। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता के बीच दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी और समुद्री सुरक्षा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
Syllabus Connection
यह लेख भारत की रक्षा नीति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के महत्व को दर्शाता है। छात्रों को भारत-जापान संबंधों, समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और क्वाड जैसे क्षेत्रीय समूहों की भूमिका को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | भारत-जापान 'समुद्र सेतु 2026' संयुक्त नौसैनिक अभ्यास। | हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा और अंतरसंचालनीयता बढ़ाने के लिए रणनीतिक पहल। |
| कब | 6 जून, 2026 को बंगाल की खाड़ी में शुरू। | क्षेत्रीय भू-राजनीतिक गतिशीलता और चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति के संदर्भ में प्रासंगिकता। |
| कौन | भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF)। | दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की गहराई और साझा रणनीतिक हितों का प्रदर्शन। |
| उद्देश्य | पनडुब्बी रोधी युद्ध, हवाई रक्षा, समुद्री टोही। | समुद्री डोमेन जागरूकता बढ़ाना, HADR क्षमताओं को मजबूत करना, नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखना। |
| महत्व | INS विक्रमादित्य, JS इझुमो की भागीदारी। | भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'सागर' दृष्टिकोण को मजबूत करना, क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 4–8 | UPSC focuses on strategic aspects: defence policy, Indo-Pacific, border issues, and bilateral defence deals. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | Defence acquisitions, military exercises, and appointments appear in SSC GK. |
| State PCS / PSC | Medium | 2–4 | State PCS papers test major acquisitions and military exercises involving India. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–5 | Army, Navy, and Air Force current events are regularly tested in Railway GK. |
Key Facts to Remember: भारत और जापान के बीच 'समुद्र सेतु 2026' संयुक्त नौसैनिक अभ्यास: हिंद-प्रशांत में रणनीतिक सहयोग
- भारत और जापान के बीच 'समुद्र सेतु 2026' संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 6 जून, 2026 को शुरू हुआ।
- यह अभ्यास बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया जा रहा है।
- अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सहयोग और अंतरसंचालनीयता बढ़ाना है।
- इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW), हवाई रक्षा और समुद्री टोही जैसे जटिल युद्धाभ्यास शामिल हैं।
- भारतीय नौसेना के प्रमुख जहाजों में INS विक्रमादित्य और P-8I पोसाइडन शामिल हैं।
- जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF) के प्रमुख जहाजों में JS इझुमो और P-1 शामिल हैं।
- यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक मुक्त और खुले वातावरण को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- दोनों देश JIMEX और मालाबार अभ्यास जैसे अन्य समुद्री अभ्यासों में भी भाग लेते हैं।
- अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौता (ACSA) दोनों देशों के बीच रसद सहायता को सक्षम बनाता है।
Practice Questions
Q1. भारत और जापान के बीच 'समुद्र सेतु 2026' संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किस स्थान पर शुरू हुआ?
- अरब सागर
- हिंद महासागर
- बंगाल की खाड़ी
- प्रशांत महासागर
Explanation: भारत और जापान की नौसेनाओं के बीच 'समुद्र सेतु 2026' संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 6 जून, 2026 को बंगाल की खाड़ी में शुरू हुआ। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है।
Q2. 'समुद्र सेतु 2026' अभ्यास का एक प्रमुख फोकस क्षेत्र क्या है?
- पर्वतीय युद्ध
- साइबर युद्ध
- पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW)
- रेगिस्तानी युद्ध
Explanation: 'समुद्र सेतु 2026' अभ्यास का एक प्रमुख फोकस क्षेत्र पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) है। इसके अतिरिक्त, इसमें हवाई रक्षा, समुद्री टोही और खोज व बचाव जैसे युद्धाभ्यास भी शामिल हैं।
Q3. भारतीय नौसेना का कौन सा विमानवाहक पोत 'समुद्र सेतु 2026' अभ्यास में भाग ले रहा है?
- INS विक्रांत
- INS विक्रमादित्य
- INS विराट
- INS विशाल
Explanation: भारतीय नौसेना का विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य 'समुद्र सेतु 2026' अभ्यास में भाग ले रहा है। यह अभ्यास दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
Q4. भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग किस रणनीतिक दृष्टिकोण के अनुरूप है?
- केवल हिंद महासागर केंद्रित
- यूरो-एशियाई सुरक्षा
- मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत
- उत्तरी ध्रुवीय समुद्री मार्ग
Explanation: भारत और जापान दोनों एक मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत के दृष्टिकोण को साझा करते हैं। 'समुद्र सेतु 2026' अभ्यास इसी साझा रणनीतिक हित को बढ़ावा देता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
Q5. भारत और जापान के बीच रसद सहायता के लिए कौन सा समझौता महत्वपूर्ण है?
- मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
- नागरिक परमाणु सहयोग समझौता
- अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौता (ACSA)
- दोहरा कराधान बचाव समझौता (DTAA)
Explanation: अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौता (ACSA) भारत और जापान को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर रसद सहायता प्रदान करने की अनुमति देता है। यह संयुक्त अभ्यासों और अभियानों के लिए महत्वपूर्ण रसद और तकनीकी समर्थन प्रदान करता है।
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